बुधवार, 23 अगस्त 2017

जीरा के इतने सारे फायदे नहीं जानते होंगे आप // You may not know the huge benefits of cumin seed

     

   

खाने के स्वाद को बढ़ाने के अलावा जीरा आपके स्वास्थ्य को भी बढ़ाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-फ्लैटुलेंटगुणों का घर माना जाता है। इसके अलावा यह डाइटरी फाइबर और लौह, तांबा,कैल्शियम,पोटेशियम, मैग्नीज, सेलेनियम, जिंक, विटामिन्स और मैग्नीशियम का बहुत अच्छा स्रोत है।
    आप जीरे के साबुत बीज एवं जीरा पाउडर दोनों का ही सेवन अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कर सकते हैं। कई ऐसे पदार्थ जिनका उपयोग हम खाना बनाने में नियमित तौर पर करते हैं उनका उपयोग कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में तथा कई बीमारियों को रोकने में सहायक होता है
जीरे के फायदे हैं

*जीरे से  ब्लोटिंग का प्रभावी उपचार-
ब्लोटिंग या फिर फूला हुआ पेट गैस का भी एक कारक है। इससे आपको पेट में दर्द भी हो सकता है। आपको ब्लोटिंग की शिकायतकब्ज, अपच,रजनोवृत्ति पूर्व सिंड्रोम (पी.एम.एस.) और इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आई.बी.एस.) की वजह से हो सकती है।मध्य पूर्व जर्नल ऑफ डाइजेस्टिव डिसीज़ में प्रकाशित एक 2013का अध्ययन का कहना है कि जीरा ब्लोटिंग सहित इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम सभी के लक्षणों में सुधार लाने में कारगर है।
ब्लोटिंग की शिकायत  मे -
1 कप पानी उबालने के लिए गैस पर चढ़ाएं।
इसमें 1 चुटकी पिसा हुआ जीरा, अदरक पाउडर और समुद्री नमक के साथ-साथ आधा चमच्च सौंफ के बीज डालें।
पांच मिनट के लिए इसे कम आंच पर उबलने दें।
.छानने के पश्चात इसे ठंडा होने दे और पी लें।
.जरूरत पड़ने पर यह प्रक्रिया दोबारा दोहराएँ
* वजन घटाने में सहायक-
जीरा भी वजन घटाने वाले आहार के रूप में उपयोग किया जाता है। क्लिनिकल प्रैक्टिस की कॉंप्लिमेंटरी थेरपीज़ में प्रकाशित 2014 के एक अध्ययन में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं के शरीर की संरचना और लिपिड प्रोफाइल पर जीरा पाउडर के सकारात्मक प्रभाव का उल्लेख किया गया है। यह शरीर में चर्बी एवं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अति सहायक है। इसके अलावा यह आपकी चयापचय क्रियाओं को उत्तेजित करता है और आपकी खाना खाने की इच्छा को कम करता है।
वजन कम करने के लिए
जीरे को भून लें।.इस भुने हुए जीरे को मिक्सी की मदद से पीसकर चूर्ण बना लें। .इस चूर्ण का एक चमच्च रोजाना दही में मिलाकर दो बार खाएं।
*जीरे  से एनीमिया का इलाज -
एनीमिया का सबसे बड़ा कारक होता है -शरीर में लौह की कमी। लौह का एक समृद्ध स्रोत होने के कारण, जीरा एनीमिया को ठीक करने में भी सक्षम है। एक चमच्च जीरे का पाउडर आपके शरीर को चार मिलीग्राम लौह से पोषित करता है। इसमें निहित लौह रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ावा देता है और थकावट जैसे एनीमिया के लक्षणों को भी हराता है।
यह आपकी उपापचय क्रियाओं में भी सुधार लाता है। लौहकी कमी को दूर करने के लिए एवं शरीर को एनीमिया से बचाने के लिए अपने दैनिक आहार में जीरा पाउडर को शामिल करें। इससे थकान, चिंता,संज्ञानात्मक दोष एवं पाचन विकार जैसे एनीमिया के लक्षणों से भी राहत मिलती है।
*जीरा पानी से उदरशूल मे आराम-
अपनी वायुनाशी गुण के वजह से जीरा उदरशूल में हो रहें दर्द का भी एक सफल उपचार है। बच्चों के उदरशूल में दर्द होना बहुत ही आम है और जीरा बच्चों को उदरशूल से हो रही पीड़ा से राहत दिला सकता है।
उदरशूल दर्द से छुटकारा पाने के लिए एक कप में एक चमच्च जीरा डालें।
.इस कप में गर्म पानी डालें और इसे ढक दें।
.15 मिनट बाद इसे छान लें।
.इस घोल का 1-2 चमच्च अपने बच्चे को पिलायें।
*जीरे का उपयोग माँ का दूध बढ़ाने के लिए-
जीरा कैल्शियम और आयरन से समृद्ध होता है यह दोनों ही गर्भवती एवं स्तनपान करा रही महिलाओं के लिए उत्तम है। यह स्तन-दूध के उत्पादन को उत्तेजित कर उसकी मात्रा में बढ़ोतरी लाता है। इसके अलावा यह माँओं को शिशु-जन्म उपरान्त खोई हुई ताकत और फुर्ती को वापिस लाने में भी सहायक है।
स्तन-दूध को बढ़ाने के लिए
एक चमच्च जीरा पाउडर एक गिलास गर्मदूधमें मिलाएं।
.इसमें शहद की मिठास मिलाएं।
.कुछ हफ़्तों के लिए इसका सेवन रोजाना रात को खाना खाने के बाद सोने से पहले करें।
*जीरा  पाचन क्रिया को बढ़ाता है-


जीरा आयुर्वेद में पेट दर्द, अपच,दस्त, पेट फूलना, मतली आदि पाचन सम्बंधित विकारों के उपचार के लिए एक बहुत ही मशहूर औषधि है। यह अग्नाशय एंजाइम जो पाचन क्रिया में समर्थक होते हैं, उन्हें उत्तेजित करता है। यह पेट में हो रही अम्लता का भी एक सफल उपचार है।

पाचन क्रिया को उत्तेजित करने के लिए-
एक गिलास पानी में 1 चमच्च भुना हुआ जीरा पाउडर मिलायें।
इसे दिन एक या दो बार रोजाना पियें।
.छाछके एक गिलास में ¼ चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर और काली मिर्चपाउडर डालें। आप इसे रोजाना एक बार पीकर भी पाचन क्रिया को प्रभावी बना सकते हैं।
* जीरा के औषधीय गुण-
मधुमेह को नियंत्रित करने केलिए
आयुर्वेद के अनुसार जीरे में बहुत अच्छेमधुमेहविरोधी गुण पाए जाते हैं। खाद्य विज्ञान और पोषण के इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित 2005 के एक अध्ययन ने भी इस बात की पुष्टि की है किजीरा हाइपोग्लाइसीमिया (hypoglycemia) और ग्लुकोसुरिया (glucosuria) में सहायता कर सकता है।
मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए
आठ चमच्च काला जीरा भून लें।
.इसके पश्चात भुने हुए जीरे को पीसकर चूर्ण बना लें।
.इस चूर्ण का आधा चमच्च पानी के साथ खा लें।
.कुछ महीनों के लिए ऐसा रोजाना दिन में दो बार करें।
नोट :- चूँकि जीरे का सेवन आपकी सर्जरी को प्रभावित कर सकता है, जीरे का सेवन सर्जरी से दो सप्ताह पहले ही करना बंद कर दें।
* जीरे की चाय से अनिद्रा का इलाज-
यदि आप अनिद्रा के शिकार है तो चिंता मत कीजिये, जीरे की मदद से आप इस विकार से आसानी से लड़ सकते हैं। जीरे में मेलाटोनिन होता है जो अनिद्रा से एवं अन्य सोने से सम्बंधित विकारों से लड़ने के लिए अनिवार्य माना जाता है। मेलाटोनिन एक ऐसा हॉर्मोन है जो आपकोसोने में सहायता करता है।
अनिद्रा को दूर भगाने के लिए-
.एक केले को अच्छे से मसल लें और फिर उसमें 1 चम्मच जीरा पाउडर मिला दें। इस मिश्रण को दैनिक रूप से सोने से पहले खाएं।
.अन्य विकल्प यह है कि आप रोजाना रात में जीरे से बनी हुई चाय पिएं।जीरे की चाय बनाने के लिए 2 या 3 सेकंड 1 चम्मच जीरे पाउडर कम आंच पर पकाये। इसके बाद इसमें 1 कप पानी डालें और इसे उबलने दें। उबलने के पश्चात इसे पांच मिनट तक ढक कर रख दें और फिर छान कर पी लें।


* जीरा बढ़ाएँ स्मरण-शक्ति-

जीरे में निहित एंटी-ऑक्सीडेंट एवं एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण स्मरण-शक्ति में तो सुधार लाते ही हैं साथ ही यह एकाग्रता के स्तर में भी सुधार लाते हैं। यह अलजाइमर एवं उम्र के साथ आने वालीयाददाश्तसंबधित विकारों का भी एक सफल उपचार है।
इसमें विभिन्न प्रकार केविटामिन बीएवंविटामिन ईभी है जो नसों को उत्तेजित कर दिमाग के कार्यशीलता में तो सुधार लाता है। 2011 में फार्मास्यूटिकल बाइऑलजी में प्रकाशित एक अध्य्यन के अनुसार जीरा का नियमित रूप से सेवन करने से स्मरण-शक्ति में सुधार आता है और दिमाग पर पड़ रहा स्ट्रेस भी कम होता है।रोजाना आधा चमच्च भुने हुए जीरे चबाकर खाएं और अपनी स्मरण शक्ति को उत्प्ररित करें।
*जीरा चूर्ण बनाए हड्डियों को मजबूत-
जीरा आपके हड्डी के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम एवं मैग्नीशियम जैसे खनिज निहित हैं जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन बी 12 भी है जो हड्डियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक है।
इसमें एस्ट्रोजन के यौगिक भी होते हैं जो रजनोवृत्ति उपरान्त महिलाओं में ओस्टेपोरोसिस के खतरे को कम करताहै।अपनी हड्डियों को स्वस्थ बनाने के लिए और उनके घनत्व में सुधार लाने के लिए अपने दैनिक आहार में जीरे को शामिल करें।
सावधानी-
हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाला जीरा ही खरीदें, जो तर्जनी (Index Finger) और अंगूठे के बीच निचोड़ने पर एक सुहानी एवं मिर्च-सा महक फैलाती है।
.जीरे को एक हवाबंद-डब्बे में ही रखें।
.पिसे हुए जीरे को हवा-सील कंटेनरों में फ्रिज में स्टोर करें।
कैसे करें जीरे का सेवन-
भुनी हुई हींग , काला नमक और जीरा समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इसे 1-3 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार दही के साथ लेने से भी मोटापा कम होता है. इससे शरीर में फालतू चर्बी तो निकलती ही है, साथ ही कोलेस्ट्रॉल भी घटता है और खून का परिसंचरण तेजी से होता है.
.एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच जीरा रात भर भिगोकर रख दें. सुबह इसे उबालें और चाय की तरह इस पानी को पीएं. बचा हुआ जीरा खा लें. इसके रोजाना सेवन से शरीर में फालतू चर्बी निकल जाती है लेकिन इस बात को ध्यान में रखें कि इस पानी को पीने के बाद 1 घंटें तक कुछ न खाएं.
वेट लॉस के लिए क्यू्मिन ड्रिंक बनाएं. इसके लिए रात में दो चम्मच जीरे को पानी में भिगो दें और सुबह इसे उबाल लें. सीड्स को पानी से अलग कर दें और पानी में आधा नींबू निचोड़े. सुबह इसे खाली पेट पीएं. लगातार दो सप्ताह तक ऐसा करें.
जीरे को वजन कम करने के लिए और भी कई तरीके से लिया जा सकता है. जीरे पाउडर को दही के साथ मिलाकर भी लिया जा सकता है. एक चम्मच जीरे को 5 ग्राम दही में मिलाकर रोजाना लें.
.3 ग्राम जीरे के पाउडर को पानी में मिला कर इसमें कुछ बूंदें शहद की मिलालें और इसे पीएं.
.वेजिटेबल सूप बनाकर इसमें एक चम्मच क्यूमिन पाउडर डालकर लें.
.ब्राउन राइस में भी जीरा पाउडर डालकर सेवन करने से फायदा होता है.
जीरे के साथ अदरक और नींबू का सेवन करने से जल्दी वजन कम होता है. अदरक को काट लें और गाजर के साथ अन्य सब्जियों को उबालें. इसमें जीरा पाउडर, नींबू और कटी हुई अदरक डालें. रात में इस सूप को पीने से वजन कम करने में फायदा होगा.
जीरे के नुकसान-
जीरा एक ऐसा मसाला है जिसके बिना तो भारतीय व्यंजनों की कल्पना करना भी असंभव सा लगता है। सभी प्रकार के भारतीय व्यंजनों में स्पेशल स्वाद के कारण जीरा का उपयोग किया जाता है।
लेकिन क्या आपजानते हैं कि जीरे के कई प्रकार के दुष्प्रभाव भी होते हैं जीरे का अधिक सेवन पाचन संबंधी समस्या, हार्टबर्न का एक कारण हो सकता है।जीरे के वातहर प्रभाव के कारण यह अत्यधिक डकार का कारण बन सकता है।
जीरे से गर्भवती महिलाओं पर गर्भान्तक प्रभाव पड़ सकता है। ज्यादा मात्रा में जीरे के सेवन से गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आंशका बढ़ जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे के अधिक सेवन से बचना चाहिए।





गुरुवार, 17 अगस्त 2017

खीरा खाने के अद्भुत फायदे // The amazing benefits of eating cucumber





बालों व त्वचा की देखभाल

खीरे में सिलिकन व सल्फर बालों की ग्रोथ में मदद करते हैं। अच्छे परिणाम के लिए आप चाहें तो खीरे के जूस को गाजर व पालक के जूस के साथ भी मिलाकर ले सकते हैं। फेस मास्क में शामिल खीरे के रस त्वचा में कसाव लाता है। इसके अलावा खीरा त्वचा को सनबर्न से भी बचाता है। खीरे में मौजूद एस्कोरबिक एसिड व कैफीक एसिड पानी की कमी( जिसके कारण आंखों के नीचे सूजन आने लगती है।) को कम करता है।
शरीर को जलमिश्रित रखने में मदद करता है
खीरे में 95% पानी रहता है। इसलिए यह शरीर से विषाक्त और अवांछित पदार्थों को निकालने में मदद करके शरीर को स्वस्थ
 और जलमिश्रित रखने में मदद करता है।
मासिक धर्म में फायदेमंद
खीरे का नियमित सेवन से मासिक धर्म में होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है। लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान काफी परेशानी होती है, वो दही में खीरे को कसकर उसमें पुदीना, काला नमक, काली मिर्च, जीरा और हींग डालकर रायता बनाकर खाएं इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।

मसूडे स्वस्थ रखता है

खीरा खाने से मसूडों की बीमारी कम होती हैं। खीरे के एक टुकड़े को जीभ से मुंह के ऊपरी हिस्से पर आधा मिनट तक रोकें। ऐसे में खीरे से निकलने वाला फाइटोकैमिकल मुंह की दुर्गंध को खत्म करता है।
विटामिन के का अच्छा माध्यम
खीरे के छिलके में विटामिन-के पर्याप्त मात्रा में मिलता है. ये विटामिन प्रोटीन को एक्ट‍िव करने का काम करता है. जिसकी वजह से कोशिकाओं के विकास में मदद मिलती है. साथ ही इससे ब्लड-क्लॉटिंग की समस्या भी पनपने नहीं पाती है।
कैंसर से बचाए
खीरा के नियमित सेवन से कैंसर का खतरा कम होता है। खीरे में साइकोइसोलएरीक्रिस्नोल, लैरीक्रिस्नोल और पाइनोरिस्नोल तत्व होते हैं। ये तत्व सभी तरह के कैंसर जिनमें स्तन कैंसर भी शामिल है के रोकथाम में कारगर हैं।
मुँह के बदबू से राहत दिलाता है
अगर मुँह से बदबू आ रही है तो कुछ मिनटों के लिए मुँह में खीरे का टुकड़ा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार पेट में गर्मी होने के कारण मुँह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है।
पाचन के लिए फायदेमंद
खीरे के छिलके में ऐसे फाइबर मौजूद होते हैं जो घुलते नहीं है. ये फाइबर पेट के लिए संजीवनी बूटी की तरह काम करता है. कब्ज की परेशानी को दूर करने में भी ये कारगर है. खीरे के छिलके से पेट अच्छी तरह साफ हो जाता है।


यह हैंगओवर को कम करने में मदद करता है

शराब पीने के बहुत सारे दुष्परिणाम होते हैं उनमें अगले दिन का हैंगओवर बहुत ही कष्ट देनेवाला होता है। इससे बचने के लिए आप रात को सोने से पहले खीरा खाकर सोयें। क्योंकि खीरे में जो विटामिन बी, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वे हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करते हैं।
वजन कम करने में सहायक
अगर आप वजन कम करना चाह रही हैं तो आज से खीरे के छिलके को अपनी डाइट का हिस्सा बना लें. वैसे तो खीरा भी वजन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन छिलके के साथ इसका सेवन करना और भी अधिक फायदेमंद रहता है।
     सलाद के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले खीरे में इरेप्सिन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है। खीरा पानी का बहुत अच्छा स्रोत होता है, इसमें 96% पानी होता है। खीरे में विटामिन ए, बी1, बी6 सी,डी पौटेशियम, फास्फोरस, आयरन आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। नियमित रुप से खीरे के जूस शरीर को अंदर व बाहर से मजबूत बनाता है।



मधुमेह व रक्तचाप में फायदेमंद

मधुमेह व रक्तचाप की समस्या से बचने के लिए नियमित रुप से खीरे का सेवन फायदेमंद हो सकता है। खीरे के रस में वो तत्व हैं जो पैनक्रियाज को सक्रिय करते हैं। पैनक्रियाज सक्रिय होने पर शरीर में इंसुलिन बनती है। इंसुलिन शरीर में बनने पर मधुमेह से लड़ने में मदद मिलती है। खीरा खाने से कोलस्ट्रोल का स्तर कम होता है। इससे हृदय संबंधी रोग होने की
 आशंका कम रहती है। खीरा में फाइबर, पोटैशियम और मैगनीशियम होता है जो ब्लड प्रेशर दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खीरा हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों में ही एक तरह से दवा का कार्य करता है।

आंखों के लिए लाभकारी

अक्सर फेसपैक लगाने के बाद आंखों की जलन से बचने के लिए खीरे को स्लाइस की तरह काटकर आंखों की पलक के ऊपर पर रखते हैं। इससे आंखों को ठंडक मिलती है। खीरा की तासीर जलन कम करने की होती है। जरूरी नहीं है कि सिर्फ फेसपैक लगाने के बाद ही ऐसा कर सकते हैं। जब भी आंखों में जलन महसूस हो तो आप खीरे की मदद ले सकते हैं।







सोमवार, 14 अगस्त 2017

अपराजिता के गुण औषधीय उपयोग // Medicinal Properties of Aparajita


आयुर्वेद के ग्रंथों में बताई गई एक बहुत ही उपयोगी जड़ी बूटी अपराजिता पौधा है. ये कई औषधीय उपयोगों के साथ एक बहुत ही सुंदर घास से बनी होती है. अपराजिता पौधा का शरीर की संचार तंत्रिका और मनोवैज्ञानिक सिस्टम पर एक बहुत सुखदायक प्रभाव पड़ता है.
अंग्रेजी नाम - क्लितोरिया , हिन्दी नाम - कोयाला , संस्कृत नाम - कोकिला , बंगाली नाम - अपराजिता , गुजराती नाम - गरणी, मलयालम नाम - शंखपुष्पम, मराठी नाम - गोकर्णी, तमिल नाम - कक्कानम, तेलुगु नाम - शंखपुष्पम, यूनानी नाम – मेज़ेरिओन


अपराजिता पौधे की पत्तियां उज्ज्वल हरी और उज्ज्वल नीले रंग की होती है. इसके फूल का रंग सफेद होता है.ये कभी-कभी शंख रूप में उगता है. ये भारत, मिस्र, अफगानिस्तान, फारस, मेसोपोटामिया, इराक आदि के सभी भागों में पाया जाता है.
अपराजिता पौधे के सभी भागों को औषधीय उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं. अपराजिता पौधा सामान्य तौर पर आयुर्वेद के पंचकर्म उपचार में प्रयोग किया जाता है. आयुर्वेद का पंचकर्म उपचार शरीर में से टॉक्सिन्स को निकालकर शरीर के संतुलन में सहायता करता है.
शरीर के आंतरिक विषहरण के लिए ये बहुत प्रभावी उपचार हैं. नर्वस सिस्टम को ठीक करने के लिए के लिए अपराजिता पौधे का उपयोग किया जाता है.
आयुर्वेद में अपराजिता जड़ी बूटी को मेध्या श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है. मेध्या जड़ी बूटिया याददाश्त और लर्निंग सुधारने में मदद करती हैं. ये मस्तिष्क के विकास की समस्याओं और इम्पैरेड कॉग्निटिव फंक्शन की समस्याओं से पीड़ित बच्चों के लिए बहुत मददगार है.
अपराजिता जड़ी बूटी डिटॉक्सिफिकेशन और मस्तिष्क की आल राउंड क्लीनिंग और उससे संबंधित स्ट्रक्टर्ज़ में मदद करती है.
अपराजिता जड़ी बूटी वॉइस क़्वालिटी और गले की समस्याओं में सुधार के लिए फायदेमंद है.
अपराजिता पौधे की जड़ को अक्सर त्वचा पर लेप बनाकर प्रयोग किया जाता है और इससे चेहरे की चमक बढ़ती है. यह आंखों पर एक बहुत कूलिंग प्रभाव डालता है. यह आँखों रोशनी में सुधार करने में मदद करता है.


अपराजिता पौधा पुरुषों में स्पर्म जनरेशन की प्रक्रिया में सुधार करने में मदद करता है. नपुंसकता मुद्दों के लिए ये बहुत अच्छा विकल्प है.
* अगर सांप के विष का असर चमड़ी के अन्दर तक हो गया हो तो अपराजिता की जड़ का पावडर 12 ग्राम की मात्रा में घी के साथ मिला कर खिला दीजिये। - सांप का ज़हर खून में घुस गया हो तो जड़ का पावडर 12 ग्राम दूध में मिला कर पिला दीजिये। - सांप का जहर मांस में फ़ैल गया हो तो कूठ का पावडर और अपराजिता का पावडर 12-12 ग्राम मिला कर पिला दीजिये। - अगर इस जहर की पहुँच हड्डियों तक हो गयी हो तो हल्दी का पावडर और अपराजिता का पावडर मिलाकर दे दीजिये। - दोनों एक एक तोला हों अगर चर्बी में विष फ़ैल गया है तो अपराजिता के साथ अश्वगंधा का पावडर मिला कर दीजिये और सांप के जहर ने आनुवंशिक पदार्थों तक को प्रभावित कर डाला हो तो - अपराजिता की जड़ का 12 ग्राम पावडर ईसरमूल कंद के 12 ग्राम पावडर के साथ दे दीजिये। इन सबका 2 बार प्रयोग करना काफी होगा। लेकिन सांप के विष की पहुँच कहाँ तक हो गयी है ये बात कोई बहुत जानकार व्यक्ति ही आपको बता पायेगा। - मेडिकल साइंस तो कहता है कि ज़हर की गति सांप की जाति पर निर्भर करती है लेकिन वे सांप जिन्हें जहरीला नहीं माना जाता जैसे पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए। गा। - मेडिकल साइंस तो कहता है कि ज़हर की गति सांप की जाति पर निर्भर करती है लेकिन वे सांप जिन्हें जहरीला न नहीं माना जाता जैसे पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए।
पानी वाले सांप उनका जहर वीर्य तक पहुँचने में 5 दिन का समय ले लेता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है अतः सांप के ज़हर का निवारण जरूर कर लेना चाहिए।

* श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) :

श्वेत कुष्ठ पर अपराजिता की जड़ 20 ग्राम, चक्रमर्द की जड़ 1 ग्राम, पानी के साथ पीसकर, लेप करने से लाभ होता है। इसके साथ ही इसके बीजों को घी में भूनकर सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से डेढ़ से 2 महीने में ही श्वेत कुष्ठ में लाभ हो जाता है। 

*चेहरे की झाँइयां :



मुंह की झांईयों पर अपराजिता की जड़ की राख या भस्म को मक्खन में घिसकर लेप करने से मुंह की झांई दूर हो जाती है। 

*आधाशीशी यानी आधे सिर का दर्द (माइग्रेन) :

अपराजिता के बीजों के 4-4 बूंद रस को नाक में टपकाने से आधाशीशी का दर्द भी मिट जाता है। Note : यहाँ जिन भी औषधियों के नाम आए है ये आपको पंसारी या कंठालिया की दुकान जो जड़ी-बूटी रखते है, उनके वहाँ मिलेगी। इस लेख के माध्यम से लिखा गया यह उपचार हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं । फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के बाद ही इनको प्रयोग करने की हम आपको सलाह देते हैं । ध्यान रखिये कि आपका चिकित्सक आपके शरीर और रोग के बारे में सबसे बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्प नही होता है ।

* सिर दर्द :

अपराजिता की फली के 8-10 बूंदों के रस को अथवा जड़ के रस को सुबह खाली पेट एवं सूर्योदय से पूर्व नाक में टपकाने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है। इसकी जड़ को कान में बांधने से भी लाभ होता है। 

*त्चचा के रोग :

अपराजिता के पत्तों का फांट (घोल) सुबह और शाम पिलाने से त्वचा सम्बंधी सारे रोग ठीक हो जाते हैं। 

*पीलिया :

पीलिया, जलोदर और बालकों के डिब्बा रोग में अपराजिता के भूने हुए बीजों के आधा ग्राम के लगभग महीन चूर्ण को गर्म पानी के साथ दिन में 2 बार सेवन कराने से पीलिया ठीक हो जाती है। 







मंगलवार, 8 अगस्त 2017

दांत और मसूड़ों के रोगों के घरेलु आयुर्वेदिक उपचार // Home Ayurvedic treatment of tooth and gums diseases



    असल में दांतों से जुड़ी हर समस्या के पीछे हमारी गलत खानपान और रहन-सहन की आधुनिक जीवन शैली है। चाय-कॉफी जैसे बेहद गर्म पेय तथा कोलड्रिक्स दोनों ही दांतों की जड़ों को कमजोर और खोखला कर देते हैं। सात्विक, ताजा तथा प्राकृतिक खानपान और सफाई के प्रति जागरूकता ही हमें दातों की समस्या से स्थाई छुटकार दिला सककी है। तो आइये हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे ही आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार के तरीके जो यकीनन आपको दांतों से जुड़ी हर दिक्कत से मुक्ति दिलाएंगे....
आजकल गलत खान-पान और ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है।
आयुर्वेद में एक कहावत है-
नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल।
नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।

सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है।
मसूढों और जबडों में होने वाली पीडा को दंतशूल से परिभाषित किया जाता है। हममें से कई लोगों को ऐसी पीडा अकस्मात हो जाया करती है। दांत में कभी सामान्य तो कभी असहनीय दर्द उठता है। रोगी को चेन नहीं पडता। मसूडों में सूजन आ जाती है। दांतों में सूक्ष्म जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने से स्थिति और बिगड जाती है। मसूढों में घाव बन जाते हैं जो अत्यंत कष्टदायी होते हैं।दांत में सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और उनमें केविटी बनने लगती है।जब सडन की वजह से दांत की नाडियां प्रभावित हो जाती हैं तो पीडा अत्यधिक बढ जाती है।
1.  मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं
2. शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वस्तुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।
3. पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में 4. बार करने से लाभ मिलेगा।


4. दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।

5.  मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और केल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।
6. हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।

7. दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।
8. बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।

9.  लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।


10. हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भरदें। कष्ट में राहत मिलेगी।

11.  तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।
12. बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।
13.  कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।
14.  प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।
15.  लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।
16.  नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।



दांतों के पस को ठीक करने के घरेलू उपचार

दांतों में पस मुख्य रूप से मसूड़ों में जलन और टूटे हुए दांत के कारण होता है। दांतों में पस मुख्य रूप से एक प्रकार का संक्रमण होता है जो मसूड़ों और दांतों की जड़ों के बीच होता है तथा इसके कारण बहुत अधिक दर्द होता है। इसके कारण दांत के अंदर पस बन जाता है जिसके कारण दांत में दर्द होता है। जिस दांत में पस हो जाता है उसमें बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है और वही बढ़ता रहता है जिससे उन हड्डियों में संक्रमण हो जाता है जो दांतों को सहारा देती हैं। यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया तो इसके कारण जीवन को खतरा हो सकता है। दंत स्वास्थ्य: स्वस्थ मसूड़ों के लिए टिप्स दांतों में पस होने के कारण जो दर्द होता है वह असहनीय होता है तथा इस दर्द को रोकने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं परंतु अंत में दर्द बढ़ जाता है। यदि आप भी मसूड़ों की इस बीमारी से ग्रसित हैं तो हम आपको बताएँगे कि आपको क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं। पहले आपको इस बीमारी के लक्षण तथा कारण पहचानने होंगे। दांतों में पस होने के कारण मसूड़ों की बीमारी मुंह की सफाई ठीक से न करना प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर होना टूटा हुआ दांत मसूड़ों में सूजन और जलन दांतों में संक्रमण बैक्टीरिया कार्बोहाइड्रेट युक्त तथा चिपचिपे पदार्थ अधिक मात्रा में खाना







शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

नाभि खिसकने (गोला टलने) का रोग ठीक करने के उपचार // Treatment of healing of umbilical capsule


नाभि का खिसकना जिसे आम लोगों की भाषा में धरण गिरना या फिर गोला खिसकना भी कहते हैं। यह एक ऐसी परेशानी है जिसकी वजह से पेट में दर्द होता है। रोगी को समझ में भी नहीं आता कि ये दर्द किस वजह से हो रहा है, पेट दर्द की दवा लेने के बाद भी यह दर्द खत्म नहीं होता। और केवल दर्द ही नहीं, कई बार नाभि खिसकने से दस्त भी लग जाते हैं।


नाभि टलने को परखिये

आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है।
ऊपर की तरफ
यदि नाभि का स्पंदन ऊपर की तरफ चल रहा है याने छाती की तरफ तो यकृत प्लीहा आमाशय अग्नाशय की क्रिया हीनता होने लगती है ! इससे फेफड़ों-ह्रदय पर गलत प्रभाव होता है। मधुमेह, अस्थमा,ब्रोंकाइटिस -थायराइड मोटापा -वायु विकार घबराहट जैसी बीमारियाँ होने लगती हैं।
नीचे की तरफ
यही नाभि मध्यमा स्तर से खिसककर नीचे अधो अंगों की तरफ चली जाए तो मलाशय-मूत्राशय -गर्भाशय आदि अंगों की क्रिया विकृत हो अतिसार-प्रमेह प्रदर -दुबलापन जैसे कई कष्ट साध्य रोग हो जाते है। फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती और इस कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर सकतीं। स्त्रियों के उपचार में नाभि को मध्यमा स्तर पर लाया जाये। इससे कई वंध्या स्त्रियाँ भी गर्भधारण योग्य हो जाती है ।
बाईं ओर
बाईं ओर खिसकने से सर्दी-जुकाम, खाँसी,कफजनित रोग जल्दी-जल्दी होते हैं।
दाहिनी ओर
दाहिनी तरफ हटने पर अग्नाशय -यकृत -प्लीहा क्रिया हीनता -पैत्तिक विकार श्लेष्म कला प्रदाह -क्षोभ -जलन छाले एसिडिटी (अम्लपित्त) अपच अफारा हो सकती है।


नाभि टलने पर क्या करे।

मरीज को सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है तथा दस्त आदि उपद्रव शांत हो जाते हैं।
नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ न दें। दिन में एक-दो बार अदरक का 2 से 5 मिलिलीटर रस पिलाने से लाभ होता है।
नाभि कैसे स्थान पर लाये-
1- ज़मीन पर दरी या कम्बल बिछा ले। अभी बच्चो के खेलने वाली प्लास्टिक की गेंद ले लीजिये। अब उल्टा लेट जाए और इस गेंद को नाभि के मध्य रख लीजिये। पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहे। खिसकी हुई नाभि (धरण) सही होगी। फिर धीरे से करवट ले कर उठ जाए, और ओकडू बैठ जाए और एक आंवला का मुरब्बा खा लीजिये या फिर 2 आटे के बिस्कुट खा लीजिये। फिर धीरे धीरे खड़े हो जाए।
2- कमर के बल लेट जाएं और पादांगुष्ठनासास्पर्शासन कर लें। इसके लिए लेटकर बाएं पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें व पैर को खींचकर मुंह तक लाएं। सिर उठा लें व पैर का अंगूठा नाक से लगाने का प्रयास करें। जैसे छोटा बच्चा अपना पैर का अंगूठा मुंह में डालता है। कुछ देर इस आसन में रुकें फिर दूसरे पैर से भी यही करें। फिर दोनों पैरों से एक साथ यही अभ्यास कर लें। 3-3 बार करने के बाद नाभि सेट हो जाएगी।
3- सीधा (चित्त) सुलाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें एवं उसे दो घण्टे चित्त ही सुलाकर रखें। दिन में दो बार यह प्रयोग करने से नाभि अपने स्थान पर आ जाती है हैं।
नाभि सेट करके पाँव के अंगूठों में चांदी की कड़ी भी पहनाई जाती हैं, जिस से भविष्य में नाभि टलने का खतरा कम हो जाता हैं। अक्सर पुराने बुजुर्ग लोग धागा भी बाँध देते हैं।
नाभि के टलने पर और दर्द होने पर 20 ग्राम सोंफ, गुड समभाग के साथ मिलाकर प्रात: खाली पेट खायें। अपने स्थान से हटी हुई नाभि ठीक होगी। और भविष्य में नाभि टलने की समस्या नहीं होगी।



नाभि या धरन ठीक करने का मंत्र

बहुत से लोग जो नाभि टलने के रोग से पीड़ित रहते है और बार बार मुझसे धरण /नाभि ठीक करने के उपाय पूछते है उनके लिए निम्न मंत्र विधि दे रहा हु प्रयोग करे और लाभ उठाएं ।
मंत्र
"ॐ नमो नाड़ी नाड़ी नौ सै बहत्तर सौ कोस चले अगाडी डिगे न कोण चले न नाड़ी रक्षा करे जति हनुमंत की आन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा "

विधि :- इस मंत्र को ग्रहण , दिवाली की महानिशा बेला में धुप दीप देकर 108 जप करके सिद्ध करले । कच्चे सूत के धागे में 9 गांठ लगाले उसे छल्ले की भांति बनाले उसे रोगी की नाभि पर रखकर इस मंत्र को 108 बार पढ़ते हुए नाभि के ऊपर फूक मारने से धरण ठिकाने पर आ जाती है ।




बुधवार, 2 अगस्त 2017

मैथी के आयुर्वेदिक घरेलु उपचार //Ayurvedic Home Remedies of Fenugreek





मेथीदाना(methi dana ) उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचनशक्ति व बल वर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है | यह पुष्टिकारक, शक्ति – स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है | सुबह – शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है, कब्ज व गैस को दूर करता है | इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं | यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी हैं |
अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, उतनी संख्या में मेथिदाने रोज धीरे – धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होनेवाली व्याधियों, जैसे – घुटनों व जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, हाथों का सुन्न पड़ जाना, सायटिका, मांसपेशियों का खिंचाव, बार – बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है | गर्भवती व स्तनपान करानेवाली महिलाओं को भुने मेथीदानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है |
स्वभाव: मेथी (methi)खाने में गर्म होती है।
हानिकारक: जिनकी प्रकृति गर्म हो और शरीर के किसी भी अंग से खून गिरता हो, जैसे- खूनी बवासीर, नाक से खून का गिरना (नकसीर), पेशाब में खून आना, मासिक-धर्म में अधिक खून आना और कई दिनों तक आते रहना आदि रोग हो, उन्हें तेज गर्मी के मौसम में मेथी का प्रयोग कम और सावधानी से करना चाहिए। मेथी का प्रभाव गर्म होता है। अत: इसे सर्दी के मौसम में सेवन करना अधिक लाभदायक है। मेथी अधिक मात्रा में खाने से पित्त बढ़ती है, इसलिए इसका सेवन मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए।
दोषों को दूर करने वाला: घी, मेथी के गुणों को सुरक्षित रखकर उसके दोषों को दूर करती है।


शक्तिवर्धक पेय :

दो चम्मच मेथीदाने(Fenugreek) एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय | इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें |
विभिन्न रोगों में सहायक
1.  आमातिसार (अमिबिक प्रवाहिका):
मेथी के पत्तों को घी में तलकर खाने और 4 चम्मच रस 1 चम्मच मिश्री के साथ खाने से आमातिसार रोग में शीघ्र लाभ मिलता है।
मेथी के पत्तों को घी में तलकर खाने से आमातिसार दूर हो जाता है।
60 मिलीलीटर मेथी के पत्तों का रस और 6 ग्राम शक्कर को मिलाकर पीना चाहिए या मेथी का चूर्ण 1 चम्मच, 100 ग्राम दही या छाछ में स्वादानुसार सेंधानमक और भुना जीरा मिलाकर सुबह-शाम पीने से आमातिसार दूर होता है।
50 मिलीलीटर मेथी के पत्तों का रस निकालकर रोजाना 2-3 बार सेवन करने से आमातिसार का रोग समाप्त हो जाता है।
4 ग्राम मेथी का चूर्ण सुबह-शाम छाछ में मिलाकर सेवन करने से जीर्ण आमातिसार में लाभ होता है।
2. वायु विकार:
मेथी को घी में भूनकर पीस लें, फिर छोटे-छोटे लड्डू बनाकर 10 दिन सुबह खाने से वात की पीड़ा में लाभ होता है। मेथी के पत्तों की भुजिया या सूखा साग बनाकर खाने से पेट के वात-विकार और सर्दी में लाभ होता है।
4 चम्मच दाना मेथी को सेंककर और पीसकर 1 गिलास पानी में उबालकर रोजाना पीने से घुटनों के दर्द में लाभ मिलता है।
मेथी के पत्तों के पकौड़े बनाकर खाने से वायु विकार दूर हो जाता है।
मेथी की सब्जी और मेथी के साथ बनी दूसरी सब्जियां खाने से बहुत लाभ होता है। 2 चम्मच कुटी हुई मेथी गर्म पानी के साथ लेने से वात-कफ के कारण होने वाला शरीर का दर्द ठीक हो जाता है। गुड़ में मेथी-पाक बनाकर खाने से गठिया रोग ठीक हो जाता है।
3. मेथी (Fenugreek)दाने को बारीक पीसकर उसमें सेंधानमक और कालीमिर्च मिलाकर चूर्ण बनाया जाता है जोकि वात रोग, पेट दर्द तथा जोड़ों के दर्द में लाभदायक है। मेथी को घी में भूनकर, पीसकर, छोटे-छोटे लड्डू बनाकर 10 दिन सुबह-शाम खाने से वात रोग में लाभ होता है। मेथी के पत्तों की भुजिया या सूखा साग बनाकर खाने से पेट के वात-विकार और आंतों की सर्दी में लाभ होता है।
4 पिसी हुई दाना मेथी 100 ग्राम, गोंद (जो लड्डूओं में डालते हैं) 30 ग्राम, बूरा 250 ग्राम। सबसे पहले मेथी रात को दूध में भिगोयें। दूध इतना हो कि मेथी सोख लें। सुबह इसे कढ़ाही में सेंक लें। गोंद को घी में तलकर पीस लें। इन दोनों को बूरे में मिला लें। रोजाना 2 चम्मच फंकी गर्म दूध से लें। यह वायु और वात रोगों में लाभकारी है।
15-20 मिलीलीटर मेथी का रस पीने से वायु विकार (गैस) से उत्पन्न उदरशूल (पेट का दर्द) तुरन्त दूर हो जाता है।
मेथी वायुनाशक, पित्तनाशक और पौष्टिक होती है। मेथी का रस पीने या सब्जी बनाकर सेवन करने से वायु विकार और पित्त विकार में आराम मिलता है।
5.  पेट दर्द और भूख लगना: मेथी के दाने को गर्म पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द ठीक हो जाता है, भूख अच्छी लगने लगती है और कमर दर्द में लाभ होता है।
6.  पेट की सर्दी तथा वायु विकार: मेथी के हरे पतों की पकौड़ी खाने से पेट की सर्दी और गैस की बीमारी ठीक हो जाती है।
7.एनीमिया (खून की कमी या रक्ताल्पता):
मेथी की सब्जी बनाकर खाने से खून साफ होता है और खून में वृद्धि होती है क्योंकि मेथी के अन्दर आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। इसलिए एनीमिया या खून की कमी में यह बहुत उपयोगी होती है।
मेथी, पालक, बथुआ आदि रोजाना सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है।
8. कॉड लीवर ऑयल: मेथी को कॉड लीवर ऑयल इसलिए कहते हैं क्योंकि इसकी रासायनिक संरचना में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूम्लियो एलब्युमिन पदार्थ पाये जाते हैं। कॉड लीवर ऑयल के समान गुण दाना मेथी के हलवे में मिलते हैं। दाना मेथी का हलवा बनाकर खायें और दूध पियें। यह कॉड लीवर ऑयल के समान लाभ देता है।
9.  निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर):
अदरक, लहसुन, गर्म मसाला आदि डालकर बनाई गई मेथी की सब्जी खाने से निम्न रक्तचाप वाले रोगियों को लाभ मिलता है।
5 ग्राम से 20 ग्राम मेथी के बीजों का चूर्ण बनाकर गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शरीर में बल की वृद्धि होती है और निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है।
10. एंजाइना का दर्द: मेथी के 1 चम्मच बीजों को डेढ़ कप पानी में उबालकर छान लें इसे दिन में 2 बार पीने से एंजाइना के रोग से छुटकारा मिलता है।
11.  मर्दाना शक्तिवर्धक: पिसी दाना मेथी और पिसा हुआ सूखा धनिया बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच रोजाना रात को गर्म दूध से लें। इसे लगातार 1 से 2 महीने तक लेने से मर्दाना शक्ति बढ़ती है। मेथी सेक्स की कमजोरी को दूर करती है। मेथी के लड्डू या 1 चम्मच पिसी मेथी 2 चम्मच शहद के साथ भी ले सकते हैं।
12.  नींद का कम आना: 
दाना मेथी का एक इंच मोटा तकिया बनाकर, सिर के नीचे लगाकर सोयें। इससे गहरी नींद आयेगी।


13. स्तनों का दूध सुखाना हो, 

स्तनों में सूजन, या दर्द: मेथी की हरी पत्तियां पीसकर लेप बना लें। इस लेप को स्तनों पर लगा करके 3 घंटे बाद धोने से स्तनों की सूजन, दर्द आदि रोग दूर होते हैं।
14. स्तन के सौन्दर्य के लिए: 
जिन स्त्रियों के स्तन किसी कारण से छोटे रह गये हैं और वह इन्हें उभारना चाहती है तो उन्हें मेथी के दानों का सेवन करना चाहिए क्योंकि मेथी में डायस्जेनिन हार्मोन होता है जो स्तनों को विकसित करता है। स्तनों को मोटा करने के लिए दाना मेथी की सब्जी खाये या दाना मेथी में पानी डालकर पीसकर स्तनों पर मालिश करें।
15.  चोट और सूजन:
इसके पत्तों को पीसकर लेप करने से दर्द में आराम मिलता है।
मेथी के पत्तों की पुल्टिश (पोटली) बांधने से चोट की सूजन मिटती है।
16.  कब्ज:
मेथी (Fenugreek)की सब्जी सुबह-शाम खाने से कब्ज समाप्त होती है।
सोते समय 1 चम्मच मेथी के साबुत दाने पानी से खाने से कब्ज दूर होगी।
1-1 चम्मच मोटा-मोटा पिसा हुआ दाना मेथी, ईसबगोल और चीनी को मिलाकर रात को गर्म दूध से फंकी लेने से कब्ज दूर हो जाती है।
यदि आंतों की कमजोरी से पेट में कब्ज हो तो सुबह-शाम 1-1 चम्मच मेथी दाने का चूर्ण पानी के साथ कुछ दिनों तक लेने से आंतों तथा यकृत (जिगर) को ताकत मिलती है तथा कब्ज दूर होती है।
2 चम्मच दाना मेथी को पानी के साथ लेने पर यह पेट की आंतों को अन्दर से गीला करके, मुलायम बनाकर, रगड़कर जमे हुए मल को निकालेगी और मल की गांठों को बनने से रोककर पेट को साफ करती है।
आंतों की कमजोरी से पेट में कब्ज बनती है, इसलिए यकृत (जिगर) को मजबूत बनाने और रोग मुक्त करने के लिए 1-1 चम्मच मेथी पाउडर पानी के साथ कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से कब्ज में राहत मिलती है।
कब्ज, पेट में अल्सर हो तो 1 कप पानी में मेथी के पत्तों को उबालकर, शहद में घोलकर सुबह-शाम को पीने से लाभ होता है।
मेथी की नर्म पत्तियों की सब्जी बनाकर खाने से कब्ज में राहत मिलती है, खून साफ होता है, शरीर में शक्ति बढ़ती है और बवासीर रोग में लाभ मिलता है।
3-3 ग्राम मेथी के पिसे हुए चूर्ण को सुबह-शाम गुड़ या पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज मिट जाती है और लीवर (जिगर) को मजबूत बनता है। पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति यदि मेथी दानों का साग खाएं तो दस्त साफ आता है।
100 ग्राम दाना मेथी को मोटा-मोटा कूटकर 50 ग्राम भुनी हुई छोटी हरड़ पीसकर मिला लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से कब्ज और पेट दर्द में लाभ होता है।
17. कमर दर्द:
मेथी (Fenugreek)दाने के लड्डू बनाकर 3 हफ्ते तक सुबह-शाम सेवन करने और मेथी के तेल को दर्द वाले अंग पर मलते रहने से कमर दर्द में पूरा आराम मिलता है।
2 चम्मच दाना मेथी और 2 छुहारे (गुठली निकाले हुए) को 1 गिलास पानी में उबालकर छान लें। रात को सोते समय छुहारे और मेथी खाकर पानी पीने से कमर दर्द में लाभ होता है।
पानी में 5 खजूर उबालकर उसमें 5 ग्राम मेथी का पाउडर डालकर सुबह-शाम पीने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
300 ग्राम दाना मेथी को 300 मिलीलीटर दूध में रात को भिगो दें। सुबह धूप में सुखाकर बारीक पीस लें, फिर इसे 60 ग्राम देशी घी में भूनकर रख लें। इसके बाद 300 ग्राम गेहूं का आटा 60 ग्राम घी में भूने, जब इसका रंग लाल-सा हो जाये तो आग से उतार लें। फिर इन दोनों एक साथ लेकर इसमें 2 किलो चीनी डालकर चाशनी बनायें। इस चाशनी में पीपल, कालीमिर्च, सोंठ, अजवायन और कुलंजन प्रत्येक 12-12 ग्राम पीसकर डाल दें। इस मिश्रण की 15-15 ग्राम के लड्डू बनाकर एक लड्डू सुबह भूखे पेट और एक लड्डू रात को सोते समच खाकर गर्म दूध पियें। इस प्रकार 6 सप्ताह तक लड्डू खाने से वायु के कारण उत्पन्न कमर दर्द ठीक हो जाता है। इसके साथ ही कब्ज, आंव (एक प्रकार का सफेद चिकना पदार्थ जो मल के द्वारा बाहर निकलता है) दूर हो जाती है।
मेथी को पीसकर कमर पर उसकी पट्टी बांधने और उसकी सब्जी खाने से कमर दर्द ठीक हो जाता है।
18. बालों की रूसी और खुश्की: 

मेथी के दानों को पानी में पीसकर बालों में सोते समय लेप लगाने से रूसी तथा खुश्की आदि रोग दूर होते हैं।
19. सर्दी-जुकाम:
मेथी (Fenugreek)के पत्तों की सब्जी सुबह-शाम खाने और इसके बीज 1 चम्मच गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से सर्दी-जुकाम के सारे कष्टों में आराम मिलता है।
जिन्हें सर्दी-जुकाम की शिकायत रहती हो, उन्हें मेथी की सब्जी ज्यादा-से ज्यादा सेवन करने से लाभ मिलता है। यह कमजोर व्यक्तियों के लिए गुणकारी होता है।
11. गले की सूजन,

 दर्द, टॉन्सिल: मेथी दाने के काढ़े से दिन में 3-4 बार गरारे (कुल्ला) करने से गले की सूजन, दर्द और टॉन्सिल्स (गांठों) में लाभ मिलता है।
12. स्तनों के आकार में वृद्धि: स्त्री के स्तन यदि अविकसित रह गए हो, तो मेथी की सब्जी और मेथी दानों के चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करते रहने से स्तनों के आकार में वृद्धि होगी। जिन महिलाओं के स्तनों में कम दूध आता हो, वह भी इसका प्रयोग करके लाभ उठा सकती हैं।
20. खांसी:
2 कप पानी में 2 चम्मच दाना मेथी उबाल-छानकर, उसमें 4 चम्मच शहद मिलाकर पीने से बलगम वाली खांसी, सांस का रोग, छाती का भारीपन, दर्द, कफ (बलगम) का प्रकोप, दमा आदि में लाभ मिलता है। जिन्हें हमेशा जुकाम-खांसी बनी रहती हो, उन्हें तिल या सरसों के तेल में गर्म मसाला, अदरक और लहसुन डालकर बनाई मेथी की सब्जी का सेवन रोजाना करना चाहिए।
2 चम्मच मेथी को 250 मिलीलीटर पानी में उबालें, जब यह एक चौथाई शेष बचे तो इसे छानकर पीयें। इससे बुखार, उल्टी, कफ-खांसी, जुकाम, न्यूमोनिया और गले की खरास दूर होती है।
1 चम्मच मेथी के दानों को 1 कप पानी में उबालें। पानी जब आधा रह जाए तो उसे छानकर पीने से खांसी मे लाभ होता है।
21.  टॉन्सिल: 1 गिलास पानी में 2 चम्मच दाना मेथी उबालकर व छानकर रोजाना सुबह और शाम गरारे करने से लाभ होता है।
22. बुखार: 
ज्वर (बुखार) होने पर मेथी की हरी पत्तियों की सब्जी खायें तथा 4 दिन तक पिसी हुई, दरदरी दाना मेथी की 1-1 चम्मच फंकी पानी से 3 बार लें।
23. तेज बुखार: बुखार जब तेज (102 डिग्री से अधिक) हो तो 3 चम्मच दाना मेथी 2 कप पानी में उबाल लें फिर पानी आधा रहने पर छानकर रोजाना 3 बार पियें। इससे तेज ज्वर (बुखार) ठीक हो जायेगा। मेथी की यह चाय ज्वर (बुखार) को कम कर देती है।
24.  हड्डी के टूटने पर: 
यदि हमारे शरीर के अन्दर के किसी भी भाग की हड्डी टूट गई हो और वह जुड़ने की सामर्थ्य हो तो मेथी के दानों का सेवन करने से लाभ मिलता है। यह हाथ-पैर के एक-एक जोड़ के दर्द को ठीक करती है।
25.  गठिया रोग (जोड़ों के दर्द में):
मेथी के दानों का चूर्ण 1 चम्मच सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से जोड़ों का दर्द, लकवा और कमर दर्द दूर हो जाता है।
मेथी की सब्जी खाने से खून में सफाई और शुद्धता आती है, वात रोग में मेथी का आटा छाछ में मिलाकर पीने से लाभ मिलता है, इसके सेवन से वायु (गैस), कफ (बलगम) और बुखार (ज्वर) दूर होता है। यह पेट के कीड़े, दर्द, सन्धिवात (गठिया), पेट में वायु गोले, कमर का दर्द और शारीरिक पीड़ा को दूर करता है।
50-50 ग्राम मेथी और सूखा आंवला, 10 ग्राम काला नमक को मिलाकर बारीक पीस लें। इसे 2 चम्मच लेकर पानी से 2 बार फंकी के रूप में लेने से गैस निकालकर वात व गठिया में लाभ होता है।
मेथी, सोंठ और हल्दी को बराबर मात्रा में मिलाकर, पीसकर रोजाना सुबह-शाम खाना खाने के बाद गर्म पानी से 2-2 चम्मच फंकी लेने से गठिया रोग में लाभ होता है।
रोजाना सुबह-भूखे पेट 1 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी में 1 ग्राम कलौंजी मिलाकर रोजाना एक बार फंकी लेते रहने से 2 सप्ताह में ही घुटनों के दर्द में लाभ होता है।


दाना मेथी हमेशा सुबह खाली पेट, दोपहर में तथा रात को भोजन के बाद आधा चम्मच पानी के साथ फांकने से घुटनों के सभी जोड़ मजबूत होते हैं और घुटनों का दर्द व एड़ी का दर्द दूर होता है।

हल्दी, गुड़, पिसी दाना मेथी और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर गर्म करके इनका गर्म-गर्म लेप रात को घुटनों पर लगाकर पट्टी बांधें। इस पट्टी को सुबह ही खोलें। इससे घुटनों का दर्द दूर होता है।
4 चम्मच दाना मेथी रात को 1 गिलास पानी में भिगो दें। सुबह पानी को छानकर गुनगुना गर्म करके पीयें। भीगी मेथी को गीले कपडे़ में पोटली बांधकर रख दें। 24 घण्टे बाद पोटली को खोलें। इसमें अंकुर निकल आएंगे। फिर अंकुरित मेथी को खायें। नमक-मिर्च अन्य चीज न मिलायें। ऐसा कुछ महीने करते रहे। इससे वात, गठिया और घुटनों के दर्द आदि में लाभ होगा।
100 ग्राम दाना मेथी को पीसकर स्वादानुसार इसमें 20 ग्राम पिसी कालीमिर्च और 10 ग्राम सेंधानमक मिलाकर 2 चम्मच सुबह-शाम खाने के बाद पानी के द्वारा फंकी लेने से वात रोग, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द और पेट दर्द में लाभ होता है।
मेथी को पीसकर उसकी फंकी लेने से 40 दिन के अन्दर बुढ़ापे के कारण उत्पन्न घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।
10 ग्राम मेथी के दानों को पीसकर हल्के गर्म पानी के साथ खाने से गठिया रोग (जोड़ों का दर्द) ठीक होता है।
मेथी के 30 ग्राम दानों को रात में पानी में डालकर रखें, सुबह जल्दी उठकर दानों को थोड़ा-सा मसलकर, पानी को छानकर थोड़ा-सा गर्म करके पीने से गठिया रोग (जोड़ों का दर्द) में बहुत लाभ होता है।
26. आग से जलने पर: मेथी के दानों को पानी के साथ पीसकर शरीर के जले हुए भाग पर लगाने से जलन शांत होती है और जलने के जख्म भी नहीं बनते हैं।
27.  श्वेतप्रदर:
मेथी के चूर्ण के पानी में भीगे हुए कपड़े को योनि में रखने से श्वेतप्रदर नष्ट होता है।
5 चम्मच दाना मेथी को 1 किलो पानी में उबालकर, छान लें बाद में उसमें चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर डूश देने से प्रदर ठीक हो जाता है।
रात को 4 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को सफेद और साफ भीगे हुए पतले कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर योनि में रखें। लगभग 4 घंटे बाद या जब भी किसी तरह का कष्ट हो, पोटली बाहर निकाल लें। इससे श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है।
4 चम्मच कुटी हुई दाना मेथी को 1 गिलास पानी में भिगो दें, फिर इस पानी छानकर योनि को धोयें। इससे श्वेत प्रदर के रोग में आराम आता है।
मेथी को पकाकर या मेथी के लड्डू खाने से श्वेतप्रदर से छुटकारा मिल जाता है। इससे शरीर हृष्ट-पुष्ट बना रहता है तथा गर्भाशय की गन्दगी बाहर निकल जाती है।
गर्भाशय कमजोर होने पर योनि से पानी की तरह पतला स्राव होता हो तो गुड़ व मेथी का चूर्ण 1-1 चम्मच मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से प्रदर बंद हो जाता है।
16. बिगड़ा जुकाम (नजला): 

3 ग्राम मेथी और अलसी के चूर्ण को 175 ग्राम पानी में उबालें, जब यह चौथाई शेष बचे तो इसे उतारकर छान लें। इसे पीने से सभी प्रकार का बिगड़ा जुकाम, जुकाम से उत्पन्न बुखार में आराम मिलता है।
28.  मासिक धर्म न आना (अनार्तव), दमा, खांसी:
4 चम्मच मेथी को 1 गिलास पानी में उबालें, जब पानी की मात्रा आधी रह जाए तो इस पानी का सेवन करने से मासिक-धर्म का न आना, दमा और खांसी आदि रोगों में लाभ मिलता है।
4 चम्मच दाना मेथी को 1 गिलास पानी में उबाल लें जब पानी आधा रह जाये तो छानकर गर्म-गर्म ही पीयें। इससे मासिक-धर्म खुलकर आयेगा। मासिक-धर्म के समय होने वाला दर्द नहीं होगा, और आराम मिलेगा। मासिक-धर्म का सौन्दर्य पर भी प्रभाव पड़ता है। मासिक-धर्म नहीं आने से, देर से आने से, दर्द के साथ आने पर चेहरे पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं। ऊपर बताये अनुसार मेथी का पानी पीने से मासिक-धर्म नियमित आयेगा तथा इसके विकार ठीक हो जाएंगे।
29. बच्चे की उत्पत्ति (प्रजनन) के बाद गर्भाशय की शुद्धि के लिए:-

 प्रजनन के बाद में मेथी को अन्य चीजों के साथ मिलाकर स्त्री को खिलाने से गर्भाशय शुद्ध होता है, भूख लगने लगती है और दस्त साफ आता है।
30. भूख न लगने पर:
यदि भूख न लगती हो या कम खाना खाने से ही पेट भर जाता हो तो 7 ग्राम दाना मेथी में थोड़ा-सा घी डालकर सेंके। मेथी जब लाल होने लग जाए तब उतार लें और ठंडी होने पर पीस लें। फिर इसे 5 ग्राम लेकर शहद में मिलाकर लगभग 45 दिनों तक सेवन करें। इससे अच्छी भूख लगेगी।
मेथी के पत्तों का साग खाने से भूख तेज होती है।
रोजाना मेथी से छोंकी गई दाल या साग-सब्जी खाने से भूख बढ़ जाती है, मुंह का स्वाद सुधर जाता है और भोजन के प्रति रुचि होती है।
31. भूख व निंद्रा के लिए: 

मेथी दाना का सेवन कई रूप में किया जा सकता है, सब्जी, दाल, खट्टी-मीठी टमाटर, दही वाली मेथी, पापड़ मेथी, हरी मेथी की दाल भाजी, मेथी की रोटी, कोफते, कच्ची मेथी का सलाद। इसे खाने भूख और नींद बढ़ती है।
32.  खूनी बवासीर:
4 चम्मच मेथी को 1 गिलास पानी के साथ या दूध में उबालकर सेवन करने से बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
4 चम्मच दाना मेथी और 1 गिलास पानी मिलाकर दोनों का काढ़ा बनायें। इसे रोजाना 2 बार पीने से बवासीर में खून आना बंद हो जाता है। यह खूनी पेचिश में लाभकारी है।
33. . बदन दर्द: 2 ग्राम मेथी चूर्ण, 2 ग्राम जीरा चूर्ण गर्म दूध के साथ सेवन करने से बदन दर्द में आराम होता है।
34.  बालों की रूसी:
नहाने के आधा घंटे के पहले मेथी को पानी में पीसकर सिर पर लेप करने से रूसी में कमी होती है।
नारियल के तेल में मेथी के पिसे हुए चूर्ण को उबालकर रोजाना सिर पर मालिश करने से रूसी नष्ट होती है।
बालों को मुलायम और चमकदार रखने के लिए मेथी को पानी में पीसकर रोजाना सिर पर लगाने से रूसी खत्म हो जाती है।
35. आंखों के नीचे कालापन होना: मेथी के दानों को अच्छी तरह धो लें फिर इसको पीसकर आंखों के नीचे लेप कर लें। ऐसा करने से कालापन दूर हो जाता है।
36.  मासिक-धर्म में अधिक खून का आना:

 1 चम्मच दाना मेथी को एक गिलास दूध में डालकर इसे एक उबाल आने तक उबालें, फिर दूध ठंडा करके छान लें। मेथी खायें और दूध में स्वादानुसार पिसी मिश्री मिलाकर रोजाना 2 बार पीयें। इससे मासिक-धर्म में अधिक खून का आना तथा शरीर के किसी भी अंग से खून का बहना बंद हो जाता है।
37.  रजोनिवृति:

 रजोनिवृति के बाद उत्पन्न रोगों में मेथी खाने से लाभ मिलता है।
38. शिशु-जन्म के बाद (प्रसवोपरान्त): 

शक्ति को बढ़ाने के लिए भी मेथी का प्रयोग किया जाता है। प्रसव के बाद महिलाओं का शरीर आमतौर पर शिथिल हो जाता है। मेथी फिटनेस को बनाये रखने के लिए काफी लाभदायक है। मेथी के सेवन से गर्भाशय शुद्ध होकर अपनी स्थिति में सिकुड़ जाता है। दाना मेथी के सेवन से 3 दिन में ही स्तनों में दूध बढ़ जाता है। 30 ग्राम पिसी हुई मेथी आधा किलो दूध में रात को भिगो दें। दूसरे दिन सुबह एक साफ बर्तन में 50 ग्राम घी डालकर गर्म करें और उसमें वह दूध व भीगी मेथी डालकर पकायें, बाद में उतारकर स्वादानुसार गुड़ डालकर हिलायें। हल्की गर्म रहने पर खायें। इस प्रकार 21 दिन तक खायें। इससे यदि स्तनों में दूध नहीं आता हो तो आने लगेगा, कम है तो मात्रा बढ़ जायेगी। दूध दोषमुक्त होकर शुद्ध हो जायेगा। गर्भाशय का संकोचन होगा। मेथी के लड्डू, मेथी-पाक या हलवा खाने से तंतुओं को शक्ति मिलती है और दर्द दूर होता है।
39.  पित्त विकार, 
सुस्ती, जी मिचलाना: मेथी के पत्तों के साग को घी में तलकर खाने से लाभ मिलता है।
37. मोटापा दूर करने के लिए: दाना मेथी या मेथी के हरे पत्ते किसी भी रूप में सेवन करते रहने से शरीर सुडौल रहता है। मोटापा नहीं बढ़ता है और पेट पतला रहता है। छाती चौड़ी होती है और कमजोरी नहीं आती है।
38. छाती में दर्द: 3 चम्मच दाना मेथी को पीसकर 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें। उबलने के बाद जब पानी तीन-चौथाई शेष बचे तो इसे छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर सोते समय पीने से लाभ मिलता है।
39. श्वेतसार (बादी बनाने वाले खाद्य पदार्थ): कुछ खाद्य-पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें खाने से आमवात, (जोड़ों का दर्द) बढ़ता है, जैसे-आलू, चावल, भिण्डी, अरबी, फूलगोभी, उड़द की दाल, बेसन से बनी सब्जियां- कढ़ी, गट्टे आदि। इनके सेवन से होने वाले दर्द को मेथी दूर करती है। खाद्य-पदार्थों से बादी करने वाला दोष दूर करने के लिए 5 बघार (मेथीदाना, कलौंजी, जीरा, सौंफ और राई) बराबर मात्रा में मिलाकर हल्का-सा पीसकर मोटा बारीक कर लें। बादी पैदा करने वाली सब्जियों में यह 5 चीजों से बनाया `पांच बघार´ का छोंक लगायें। सब्जी में जितनी मात्रा में जीरा डाला जाता है, उतनी मात्रा में यह पंच बघार लें। इससे सब्जियों का बादीपन दूर होता है।


40. गठिया, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, साइटिका:

41. आमवात (जोड़ों का दर्द):
एक गिलास पानी में 3 चम्मच दाना मेथी रात को भिगो दें, सुबह उठकर इसे तेज उबालकर छानकर पियें। इससे आंव (एक तरह का सफेद चिकना मल) बाहर निकल जायेगा और आमवात (जोड़ों के दर्द) में लाभ मिलता है।
मेथी और सोंठ का चूर्ण 4-4 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से जीर्ण आमवात (जोड़ों के दर्द) में लाभ होता है।
1 चम्मच दाना मेथी की फंकी गर्म दूध के साथ लेने से पेट की चिकनाई साफ होकर वायु का असर कम हो जाता है।
100 ग्राम दाना मेथी को सेंककर बारीक पीस लें और इसमें 25 ग्राम काला नमक मिलाकर रोजाना 2 चम्मच गर्म पानी के साथ फंकी लें, इससे जोड़ों के दर्द में आराम आता है।
2 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को 1 गिलास पानी में उबालकर, छानकर, उसमें स्वादानुसार पिसी कालीमिर्च, सेंधानमक डालकर रोजाना 2 बार पीने से आमवात (जोड़ों का दर्द) में आराम मिलता है।
42. वातरोग:
100 ग्राम दाना मेथी, नारियल, मूंगफली या सरसों को पीस लें और अच्छी तरह उबालकर, छानकर शीशी में भर लें और जोड़ों में जहां-जहां दर्द हो, मालिश करें। 2 चम्मच दाना मेथी की सुबह-शाम पानी से फंकी के साथ लेने से आराम मिलता है। यह प्रयोग 3-4 महीने तक करें। इसके प्रयोग के समय घी-तेल कम से कम लें।
पिसी मेथी, सोंठ और गुड़ बराबर मात्रा में मिलाकर 2 चम्मच सुबह-शाम खाने से वात (गैस) में लाभ होता है।
दाना मेथी, हल्दी, सोंठ 50-50 ग्राम और 25 ग्राम अश्वगंधा को बराबर लेकर पीस लें। इसे सुबह नाश्ते के बाद तथा रात को खाने के आधा घंटे बाद गर्म पानी के साथ इस मिश्रण की 1-1 चम्मच फंकी लेने से कमर-दर्द, गठिया, जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।
43. बलगम: 

10 ग्राम दाना मेथी, 15 ग्राम कालीमिर्च, 50 ग्राम शक्कर, 100 ग्राम की बादाम गिरी को पीसकर मिला लें। रोजाना गर्म दूध से रात को सोते समय 1 चम्मच फंकी लेने से खांसी, दमा में बलगम, जुकाम, साइनोसाइटिस और कब्ज सभी में लाभ होता है। इसका सेवन ठंडी प्रकृति वाले लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है।
44. मधुमेह (डायबिटीज):
शाम को 5 ग्राम मेथी के दाने एक कप पानी में डालकर रखें। सुबह उसी पानी में मेथी को पीसकर सेवन करने से खून में शक्कर का मिलना बंद हो जाता है।
मेथी के दानों का चूर्ण 2-2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार सेवन करने से शरीर में चीनी और कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती जाती हैं।
5 ग्राम मेथी का चूर्ण खाना-खाने के आधा घंटे पहले सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ होता है।
6 ग्राम मेथी के दाने को पीसकर रात को 250 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। सुबह इसे मिलाकर छानकर बिना मीठा मिलाये पी जायें। 2 महीने तक सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) जड़ से मिट जाता है।
10-10 ग्राम मेथी के दाने, सूखा करेला को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह के समय 1-2 चम्मच तक ताजे पानी के साथ खाने से मधुमेह (डायबिटीज) का रोग दूर हो जाता है।
2 चम्मच मेथी दाना में 1 चम्मच सौंफ मिलाकर कांच के गिलास में 200 मिलीलीटर पानी में रात को भिगो दें। सुबह कपडे़ से छानकर पी लें। जिन रोगियों को मेथी गर्मी करती हो ऐसे गर्म प्रकृति वाले मधुमेह (डायबिटीज) तथा अल्सरेटिव कोलाइटिस के रोगियों के लिए यह प्रयोग बहुत ही अच्छा रहता है।
60 ग्राम दाना मेथी को बारीक पीसकर 1 गिलास पानी में भिगो दें। इसे 12 घंटे बाद छानकर पिलायें। इस प्रकार सुबह-शाम 2 बार रोजाना 6 सप्ताह तक रोगी को पिलाने से मधुमेह (डायबिटीज) ठीक हो जाता है। इसके साथ मेथी के हरे पत्तों की सब्जी खायें।
रात को 1 चम्मच मेथी और आंवला को पीसकर 1 ग्राम चूर्ण का सेवन करने मधुमेह (डायबिटीज) में फायदा होता है।
मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी को 6 महीने तक मेथी जूस रोज सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।
मधुमेह के रोगी को भोजन से 15 मिनट पहले मेथी दाने का चूर्ण या बारीक पाउडर पानी या छाछ के साथ लेना चाहिए। शुरू में 25 ग्राम सुबह-शाम लें।
2 ग्राम मेथी दानों का चूर्ण दूध के साथ रोजाना 2 बार लेने से मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ मिलता है।
25 ग्राम मेथी के बीजों को रात में भिगायें, सुबह पानी छानकर, बीजों को निकालकर पीसें, फिर उसमें आधा नींबू निचोड़कर पीयें। इससे मधुमेह में लाभ मिलता है।

20 ग्राम मीठा दही तथा 100 ग्राम लाल टमाटर को मिक्सी में पीसकर रस छान लें। इसमें 2 चम्मच पिसी दाना मेथी मिलाकर रोजाना एक बार पीने से मधुमेह (डायबटीज) में लाभ होता है।
मेथी को मोटा-मोटा (दरदरा) कूट लें। इस मेथी चूर्ण को 20 ग्राम की मात्रा में रात को 1 गिलास पानी में भिगों दें। सुबह इस पानी को छानकर खाली पेट ही पियें, यह मधुमेह के रोगियों के लिए अमृत के समान हितकारी है। यदि इसमें विजयसार की लकड़ियां या इसका बुरादा भी 3 ग्राम की मात्रा में भिगो दें तो यह और भी अधिक लाभदायक हो जाता है।
3 चम्मच दाना मेथी को रात को 1 कप पानी में भिगो दें। फिर सुबह इसे छानकर मेथी के बीजों को बारीक पीसकर इसी पानी में घोलें। इसे 2 महीने तक रोजाना रोगी को पिलाने से मधुमेह (डायबिटीज) में आराम मिलता है। सावधानी: दाना मेथी और मेथी के बीज अलग-अलग होते हैं। मेथी के बीज बीजों की दुकान पर मिलते हैं जो दाना मेथी से बहुत छोटे होते हैं।
3 चम्मच दाना को मेथी 1 गिलास पानी में रात को भिगोकर सुबह पानी छानकर पियें और इसको अंकुरित करके खाने से मधुमेह (डायबिटीज) रोग में लाभ होता है।
500 ग्राम दाना मेथी धोकर 12 घंटे तक पानी में भिगोकर दाने फूलने पर छानकर मेथी निकालकर सुखाकर पीस लें। इसे 2-2 चम्मच सुबह-शाम पानी से फंकी लेने से मधुमेह (डायबिटीज) के रोग में आराम आता है।
100 ग्राम भुनी हुई दाना मेथी और 100 ग्राम जामुन को पीसकर मिला लें। इस मिश्रण को 2 चम्मच लेकर करेले के रस और पानी के साथ सुबह-शाम रोजाना लेने से मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ मिलता है।
मेथी, हल्दी, आंवला को बराबर मात्रा में पीसकर मिला लें। रोजाना 1 चम्मच इस मिश्रण की पानी से फंकी लगातार 2 महीने लेते रहने से मधुमेह (डायबिटीज) में आराम मिलता है।
मेथी दाना को पीसकर पाउडर बनाकर रख लें, इस पाउडर को सुबह-शाम भोजन करने से 20 मिनट पहले 2 चम्मच की खुराक पानी के साथ लें। इसे 20 दिनों तक देने से खून और पेशाब में शक्कर आना कम हो जाता है। इस नुस्खे के इस्तेमाल से मधुमेह, बहुमूत्रमेह तथा हृदय रोग भी दूर होते हैं।


सामग्री- आधा किलो हरी मेथी, आधा किलो पालक, मूली 250 ग्राम, मूंग की दाल 20 ग्राम, टमाटर 20 ग्राम, प्याज 20 ग्राम, मसाले बहुत कम। विधि- मेथी के पत्ते व मूंग की दाल, पालक, मूली को धोकर बारीक काट लें और प्रेशर कुकर में उबालकर साग बना लें। गलने पर टमाटर, प्याज, मसाला डालकर तड़का तैयार करके उसमें मिला दें यह मेथी का साग मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है, क्योंकि इससे कार्बोज की मात्रा बहुत कम होती है।

45.  बूंद-बूंद पेशाब का आना: मेथी के दानों का पाउडर बनाकर 1-1 चम्मच मेथी और शहद को मिलाकर रात को सोते समय खा लें। पेशाब खुलकर आयेगा और शीघ्र ही लाभ मिलेगा।
46.शरीर की जलन:
मेथी के पत्तों को अच्छी तरह पीसकर पानी में घोलकर पी जाएं, और शरीर पर लेप करें। इससे शारीरिक जलन में राहत मिलती है।
शरीर में कहीं भी जलन, दाह, भभका हो तो जलन वाले स्थान पर दाना मेथी के पत्ते या मेथी दाना को पानी में चटनी की तरह पीसकर लेप करें अथवा 4 चम्मच दाना मेथी 2 कप पानी में भिगोकर, छानकर रोजाना 2 बार पिलाने से आंतरिक जलन दूर हो जाती है।
शरीर में जलन होने पर मेथी के पत्तों को ठंडाई के जैसे पीस लें और पानी में घोलकर पी जायें। इससे शरीर की जलन और भभका शांत हो जाता है।
47.पेशाब का अधिक आना:
मेथी की भाजी के 100 मिलीलीटर रस में या 40 मिलीलीटर हरे पत्ते वाले मेथी के रस में डेढ़ ग्राम कत्था तथा 3 ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना 1 सप्ताह सेवन करने से लाभ मिलता है।
मेथी का साग रोजाना खाने से पेशाब का बार-बार आना ठीक हो जाता है।
दाना मेथी व हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर 2 चम्मच दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ मिलता है। हरी पत्ती वाली मेथी का 1 कप रस रोजाना पीने से लाभ मिलता है। यह रोग कई कारणों से भी हो जाता है। जैसे: मूत्राशय में मूत्र धारण शक्ति का कमजोर पड़ जाना, जिगर में कमजोरी होने पर घी, तेल, शक्कर (चीनी) के सेवन करते रहने से मूत्रतंत्र पर बोझ पड़ता है, इससे मूत्राशय को नुकसान होता है। ऐसी स्थिति बनने पर घी, तेल, चीनी आदि का सेवन कम से कम करना चाहिए।
यदि बार-बार पेशाब करने जाना पड़ता हो, जलन भी होती है तो रोगी को रोजाना मेथी का साग खिलायें। इससे बार-बार पेशाब जाने की समस्या से छुटकारा तो मिलेगा ही, आंव (एक तरह का सफेद चिकना मल) की शिकायत भी ठीक हो जाएगी। सहायक उपचार के रूप में रोगी को अंगूर खिलाये व शाम को पालक की सब्जी खिलाने से आराम मिलता है।
48. स्नायविक दौर्बल्य (नर्वस सिस्टम):
20 ग्राम दाना मेथी, हल्दी और सोंठ 10-10 ग्राम पीसकर रख लें, फिर 1 चम्मच सुबह-शाम पानी से लेने से लाभ होता है।
2 चम्मच दाना मेथी की फंकी पानी के साथ लेने से शरीर का दर्द दूर होता है।
हरी पत्ती वाली मेथी की सब्जी और मेथी के लड्डू खाने से शरीर का दर्द, वायु के दर्द और साइटिका में लाभ मिलता है।
रोजाना दाना मेथी या हरी पत्ती वाली मेथी की सब्जी खाने से वायु का दर्द ठीक हो जाता है।
49.  पाचन संस्थान के रोग के लिए: मेथी पाचन संस्थान (पाचनतंत्र) को ठीक रखती है। मेथी के खाने से पेट के कृमि (कीड़े) नष्ट होते हैं, भूख बढ़ती है, कब्ज दूर होता है, पेट साफ होता है, पेट की आंव को पतलाकर बाहर निकालती है। पेट और आंतों की सूजन को ठीक करती है। मुंह की दुर्गन्ध को दूर करती है। दाना मेथी 4 घंटे पानी में भिगोकर उसी पानी में उसकी सब्जी बनाकर रोजाना खाने से गैस, अपच, वात में आराम मिलता है। मेथी यकृत, आमाशय और नाड़ी-संस्थान पर अपना काफी अच्छा प्रभाव छोड़ती है। मेथी पेट से सम्बंधित विकारों को दूर करती है।
50.  ऑव (दस्त के ऑव आना):
4 चम्मच पिसी मेथी एक कप मीठे दही में मिलाकर रोजाना सुबह खाने से मल के साथ ऑव आना बंद हो जाता है।
2 चम्मच पिसी दाना मेथी को 1 कप दही में मिलाकर 2 बार खाने से दस्त बंद हो जाते हैं।
मेथी के पत्तों की सब्जी घी में छोंककर खाने से दस्त बंद हो जाते हैं।
100 मिलीलीटर मेथी के पत्तों के रस में 2 चम्मच चीनी डालकर पीने से दस्त और दस्त के साथ आंव का आना बंद हो जाता है।
उल्टी, दस्त हो तो दाना मेथी की फंकी गर्म दूध से 3 बार रोजाना लेने से लाभ होता है।
2 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को 1 गिलास पानी में डालकर उबाल लें, जब पानी आधा शेष बचे तो इसे छानकर फीका पानी ही सुबह भूखे पेट तथा रात को सोते समय 1 महीने तक रोजाना पीने से इन लाभ मिलता है। पतले-दुबले शरीर वाले और जिनका शरीर रूक्ष (रूखा) हो, वे सभी इसका प्रयोग अति सावधानी से थोडे़ से समय तक ही करें।
51. कृमि (कीड़े): बच्चों के पेट में कीड़े हो जाने पर उन्हें मेथी का 2 चम्मच पानी रोजाना पिलाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
52.  . गले में छाले में हो जाने पर: 1 किलो पानी में 2 चम्मच दाना मेथी डालकर हल्की आग पर अच्छी तरह उबलने पर पानी को छान लें, इस पानी से गरारे करने से गले के छाले दूर हो जाएंगें, यदि टॉन्सिल्स में सूजन हो या वे पक गये हो तो वे भी ठीक हो जाते हैं। मसूढ़ों में से खून आता हो तो खून निकलना बंद हो जाता है।
53.  पेट दर्द:
3 चम्मच दाना मेथी को 1 गिलास पानी में उबालकर पानी पीने से या 2 चम्मच गर्म पानी से मेथी के चूर्ण की फंकी लेने से पेट की गैस, पेट में ऐंठन तथा दर्द आदि में लाभ होता है।
दाना मेथी और अजवायन को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें स्वादानुसार कालानमक मिलाकर गर्म पानी से 2 बार फंकी लें। इससे पेट का दर्द ठीक हो जाता है।
मेथी के दानों को पीसकर 1 चम्मच सुबह-शाम गर्म पानी के साथ लेने से पेट दर्द ठीक हो जाता है।
मेथी के हरे पत्तों की पकौड़ी बनाकर खाने से पेट का दर्द और वायु विकार ठीक हो जाते हैं।
54.  पेट दर्द, दस्त में: दाना मेथी, अजवायन, हरड़, जीरा प्रत्येक 50-50 ग्राम, 40 ग्राम काला नमक और 250 ग्राम सौंफ को एक साथ पीसकर रख लें। सुबह-शाम भोजन के बाद इसे 2 चम्मच भर लेकर पानी से फंकी लें। इससे पेट दर्द और दस्त ठीक हो जाते हैं।
55.  अम्लपित्त (एसिडिटिज): 

100 मिलीलीटर मेथी के पत्तों का रस और इतना ही पानी मिलाकर पीने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) में लाभ होता है।
56. . यकृत से सम्बंधी रोग: यकृत (जिगर) की कार्यक्षमता में वृद्धि करने के लिए सुबह नाश्ते में उबले हुए मेथी के बीजों को खाने से आराम मिलता है। यह अपच (भोजन का न पचना) को भी दूर करता है।
57.  आमाशय में घाव होने पर: 2 चम्मच दाना मेथी को 2 कप पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाये तो पानी को छानकर पियें तथा उबली हुई मेथी खायें। चाय की तरह गर्म-गर्म यह काढ़ा दिन में 3 बार, सुबह नाश्ते से आधा घंटे पहले, दोपहर में भोजन से आधा घण्टे पहले और रात में सोने से आधा घंटा पहले लेने से लाभ होता है। यदि पीने में कठिनाई हो तो इसमें थोड़ा गर्म दूध और देशी खांड़ मिलाकर चाय के रूप में भी लिया जा सकता है। 1 सप्ताह से लेकर 1 से 2 महीने तक इसका सेवन करने से लाभ मिलता है।
58. . भूख, पेट-दर्द होने पर: 

दाना मेथी की फंकी गर्म पानी के साथ लेने से पेट-दर्द ठीक होता है और भूख खुलकर लगती है।
59.  गैस:
दाना मेथी और अजवायन को बराबर मात्रा में पीसकर लेकर पीस लें। यह मिश्रण एक चम्मच लेकर इसमें 5 बूंद कलौंजी के तेल को मिला लें। इसे सुबह खाली पेट और रात को सोते समय तक तक उपयोग करें जब तक लाभ न हो, रोजाना पानी से फंकी लेते रहें। खाने में अरबी और आलू का सेवन न करें। इससे पेट की गैस में बहुत बहुत लाभ होता है।
1 चम्मच पिसी हुई मेथी और 1 चम्मच शहद को मिलाकर रोजाना सुबह भूखे पेट 10 दिन खाने से पेट में गैस का बनना बंद हो जाती है।
मेथी का साग खाने से पेट की गैस में लाभ होता है।
100 ग्राम मेथी के दानों को भूनकर इसमें 25 ग्राम काला नमक मिलाकर बारीक पीस लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण खाना खाने के बाद सुबह-शाम पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
दाना मेथी, अर्जुन की छाल, खैर और आंवला को बराबर लेकर पीस लें। इसे 1-1 चम्मच ठंडे पानी से सुबह खाली पेट फंकी की तरह लेने से पेट की गैस में आराम मिलता है। इससे पेट का भारीपन दूर होता है और भूख लगने भी लगने लगती है।
20 ग्राम मेथी को रोजाना सुबह के समय खाने से वायु (गैस) के विकार दूर हो जाते हैं।
60.  अपच: मेथी के हरे पत्ते उबालकर, दही में रायता बनाकर सुबह और दोपहर में खाने से बदहजमी (भोजन का न पचना) के रोग में लाभ होता है।
61. . बवासीर (अर्श) :
रोजाना मेथी की सब्जी का सेवन करने से वायु (गैस), कफ (बलगम) और बवासीर में लाभ होता है।
20 ग्राम मेथी के दानों को 300 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं, इस काढ़े को छानकर दूध के साथ पियें। इससे बवासीर रोग नष्ट होता है तथा रक्तस्राव (खून का बहाना) भी बंद होता है।
62. रोग-निरोधक, शक्तिवर्धक:
मेथी में कोलाइन तत्त्व होता है, जो विचार शक्ति को बढ़ाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो रोग-प्रनिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। 2 चम्मच दाना मेथी 1 गिलास पानी में 5 घंटे तक भिगोयें और फिर इतना उबाल लें कि चौथाई मात्रा में रह जाये। इसे छानकर 2 चम्मच भर लेकर शहद के साथ 1 बार रोजाना पियें। इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है और शरीर शक्तिशाली होता है। मेथी में लोहा होता है जो शरीर को शक्ति देता है और खून बढ़ाता है। मेथी के पत्तों की सब्जी भी खाने से लाभ होता है।
100 ग्राम दाना मेथी को घी में भून लें और दरदरा (मोटा-मोटा) कर लें। इसे 1-1 चम्मच भर लेकर दिन में 3 बार पानी से फंकी लें। इससे शारीरिक कमजोरी दूर होगी और वीर्य पुष्ट होगा।
1-1 किलो दाना मेथी और गेहूं को मिलाकर पीस लें फिर इसे 2 चम्मच की मात्रा में 2 महीने तक नियमित सुबह-शाम दूध के साथ फंकी लें। इससे शरीर मजबूत होता है।
1 चम्मच दाना मेथी की फंकी पानी से 2 बार लेने से स्नायविक दुर्बलता, कमजोरी और सूखा रोग (रिकेट्स) दूर हो जाता है।
63.  कील-मुंहासे, झुर्रियां:
दाना मेथी को इतने दूध में भिगोयें कि वह दूध को सोख ले। इस दूध को चेहरे पर लगाने से त्वचा का सूखापन दूर होकर त्वचा कोमल हो जाती है। मेथी के पत्ते पीसकर लगाने से भी लाभ होता है।
स्नान से आधा घंटा पहले मेथी की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप करें। इससे चेहरे की झुर्रियां और सूखापन दूर होगा। गर्मी से होने वाले त्वचा के रोग, फोडे़-फुन्सियों में भी इससे लाभ मिलता है। मेथी की हरी पत्तियों की चटनी को रात पर चेहरे पर लेप लगाकर सुबह धो लेने से मुंहासे, कालापन, सूखापन और झुर्रियां दूर हो जाती हैं और चेहरे का रंग साफ होता है।
64.  सोराइसिस: 

सोराइसिस रोग में मेथी का सेवन करना लाभदायक होता है।
65. फोड़े-फुंसी:

 दाना मेथी को पानी में भिगो दें, फिर इसे पीसकर इसमें थोड़ा-सा घी या तेल मिलाकर रख लें। इसके बाद इसे गर्म करके पोटली बनाकर बांधने से फोड़े-फुंसी में लाभ मिलता है।
67.  गर्दन में दर्द:
मेथी के दानों को पीसकर पानी में लेप बना लें। इस लेप को दिन में 3 बार गर्दन पर लगाने से गर्दन के दर्द में लाभ होता है।
1 चम्मच दाना मेथी की फंकी रोजाना पानी से सुबह-शाम लेने से गर्दन का दर्द दूर हो जाता है।
68.  गले में सूजन, टान्सिल व खराश होने पर: 1 गिलास पानी में 3 चम्मच दाना मेथी डालकर उबाल लें, फिर इस उबले हुए पानी को छानकर गरारे करें। उबली हुई दाना-मेथी पर स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च डालकर खाने से आराम मिलता है।
69. . बाल टूटना:
हरी पत्तों वाली मेथी की सब्जी खायें तथा 1 चम्मच दाना मेथी की फंकी रोजाना पानी से लें। इससे बाल टूटना बंद हो जाते हैं।
मेथी के बीजों या मेथी की पत्तियों का पेस्ट बनाकर सिर में लगायें और सूखने पर बालों को धो लें। इससे बालों का झड़ना रुकता है। इसके साथ ही बालों का रूखापन भी दूर होता है।
मेथी के बीज को पीसकर बालों में लेप करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।
70.  बाल काले करने के तरीके:
50 ग्राम पिसी हुई दाना मेथी या 50 ग्राम मेथी के पत्ते, तिल या नारियल के 100 मिलीलीटर तेल में डालकर 4 दिन रखें। फिर छान लें। इस तेल को बालों पर लगायें। इससे बाल काले और चमकदार रहेंगे।
5 चम्मच दाना मेथी को 1 गिलास पानी में रात को भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छानकर बाल भिगोकर आधे घंटे बाद धो लें, इससे फरास और बाल गिरना बंद होता है। इससे गंज के स्थान पर बाल आते हैं तथा बाल लंबे, काले और मुलायम हो जाते हैं।
50 ग्राम दाना मेथी रात को पानी में भिगोयें। सुबह मेथी को पीसकर बालों पर लेप करके आधे घंटे बाद धो लें ऐसा रोजाना करते रहने से बाल काले हो जाते हैं।
71.  फरास:
2 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को आधा कप खट्टी छाछ या दही में मिलाकर सिर पर मलें और 15 मिनट बाद सिर धो लें। इसे सप्ताह में 3 बार करें। इससे सिर की फरास दूर हो जाती है और बाल गिराना बंद हो जाते हैं।
दाना मेथी भिगोकर, पीसकर या मेथी के ताजा हरे पत्ते पीसकर बालों की जड़ों में लेप करें। आधा घंटे बाद धोयें। इससे फरास दूर हो जाती है। बाल टूटना बंद होकर बाल घने होते हैं तथा बाल काले और चमकदार होते हैं।
2 चम्मच पिसी हुई मेथी और आधा कप दूध को मिलाकर सिर पर मलें, फिर सिर धोयें। इससे फरास दूर हो जाती है और बाल गिरना बंद हो जाते हैं।
दाना मेथी, मेहंदी, त्रिफला, मुल्तानी मिट्टी सबको पीसकर पानी डालकर पेस्ट बना लें और सिर में लगायें। 1 घंटें बाद सिर धोयें। शुरुआत में सप्ताह में 2 बार, बाद में एक बार इसी प्रकार सिर धो लें। ऐसा करने से बालों का झड़ना बंद हो जायेगा।
सरसों या नारियल के 100 मिलीलीटर तेल में 25 ग्राम पिसी हुई दाना मेथी, 15 ग्राम नीम की पत्तियों का रस या सूखी पत्तियों का पाउडर डालें, उनमें पिसी हुई 5 लौंग और 3 ग्राम दवा के काम आने वाला कपूर मिलायें। इनको उबाल लें, जब नीम की पत्ती का रस जल जाये तो छानकर शीशी में भर लें। इसे सप्ताह में 2 बार लगायें। इससे फरास जमना और बालों का गिरना बंद हो जाता है।
72. रूखे बाल:
4 चम्मच एरण्डी तेल, 4 मसले हुए आलू, 2 चम्मच मेथी पाउडर, 2 चम्मच भृंगराज बूटी का पाउडर और 2 चम्मच शिकाकाई पाडडर का गाढ़ा घोल बनाकर बालों और सिर में लगा लें। एक घंटे तक लगा रहने दें और फिर धोंयें। इससे बालों का रूखापन दूर होता है।
4 बड़े चम्मच दही में 3 चम्मच पिसे हुए मेथी दानों को भिगो दें, आधा घंटा भीगने के बाद सिर की त्वचा पर लगाकर आधा घंटा लगायें रखें, फिर बालों को धों लें। इससे बाल मुलायम हो जाएंगें।
4 चम्मच मेथी पाउडर, 1 नींबू का रस, 1 केला मसला हुए लें। इन सबको मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे सिर पर लगाकर सूखने के बाद धोयें। इससे बाल साफ, मुलायम और चमकदार हो जायेंगे।
73. गंजापन: दाना मेथी को पीसकर सिर में गंजेपन के स्थान पर रोजाना लेप करने से बाल उग जाते हैं।
74. बालों का कंडीशनर: 70 ग्राम मेथी की हरी पत्तियों को रात भर पानी में भिगोकर रखें। सुबह पानी छानकर निकाल दें और पत्तियों को बिना पानी डालकर पीस लें। इसमें 35 ग्राम दही मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को बालों पर और बालों की जड़ों में लगायें। इसे लगाने के 20 मिनट बाद धोयें। इस प्राकृतिक कंडीशनर से बाल मुलायम हो जायेंगे तथा फरास भी निकल जायेगी। मेथी और दही की मात्रा पेस्ट जैसा बनाने के लिए आवश्यकतानुसार घटा-बढ़ा लें
75. धूम्रपान छोड़ने के लिए: 

125 ग्राम दाना मेथी को रात को 1 कप पानी में 2 चम्मच नमक घोलकर भिगो दें। सुबह पानी छानकर फेंक दें तथा दाना मेथी पर 2 नींबू निचोड़कर धूप में सुखा लें या सेंक लें। धूम्रपान करने, तम्बाकू, जर्दा खाने की इच्छा होने पर आधा चम्मच मेथी मुंह में लेकर चूसते रहें। कुछ समय बाद मेथी खा जायें। इससे धूम्रपान की आदत छूट जायेगी। इससे धूम्रपान तो छूटेगा ही, साथ ही नस-नाड़ियों के अवरोध दूर होकर आंखों का तेज तथा उत्साह बढ़ेगा और स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा।
76. गले में खराश, सूजन, अल्सर: मेथी के पत्तों को उबाल-छानकर पानी से गरारे करने से लाभ होता है।
79. गलगण्ड या घेंघा (गोइटर): 100 ग्राम मेथी दरदरी (मोटी-सी) पीस लें। इस पाउडर में स्वादानुसार नमक मिलाकर एक चम्मच रोजाना 3 बार पानी से फंकी लेने से गलगण्ड में लाभ होता है।
77. . लू लगना:
थोडे़ से मेथी के सूखे पत्ते 1 गिलास पानी में कम से कम 4 घंटे तक भीगने दें, फिर इसे मसलकर छान लें। इसके बाद इसे शहद के साथ पीने से लू का प्रभाव दूर हो जाता है।
मेथी की सूखी भाजी ठंडे पानी में भिगोकर रख दें और अच्छी तरह भीग जाने पर उसे मसलकर पानी को छान लें। उसमें थोड़ा-सा शहद मिलाकर पीने से लू में लाभ होता है।
मेथी के पत्तों को पानी में भिगोकर कुछ घंटे रखें, फिर उन पत्तों को मसलकर, पानी को कपड़े में छानकर, उसमें शहद मिलाकर सेवन करने से लू का प्रकोप समाप्त हो जाता है।
मेथी के पत्तों को पीसकर शरीर पर लेप की तरह मलने से और लगभग 10 ग्राम मिश्री के साथ घोटकर पीने से शरीर को ठंडक पहुंचती है और लू नहीं लगती है।
78. . मुंह में दुर्गंध होने पर: 2 चम्मच मेथी दानों को 1 गिलास पानी में उबालकर पानी छान लें। फिर मेथी दानों को खाकर आधे पानी से कुल्ला करें और बचा हुआ आधा पानी पीने से मुंह की दुर्गन्ध दूर हो जाती है।
79. . पायरिया: दाना मेथी को भिगोकर पानी छानकर पी जायें तथा मेथी और मिश्री को मिलाकर खायें। इससे पायरिया में लाभ होता है।
80. . प्रसव के समय की परेशानी: 1 किलो दाना मेथी को पीसकर देशी घी में भून लें। फिर इसमें 1 किलो गुड़ और दुबारा घी डालकर भूने। जब गुड़, मेथी, घी मिलकर एक से हो जाये तो ठंडा करके 20-20 ग्राम के लड्डू बना बना लें। यदि गर्भवती स्त्री 8 वें महीने से रोजाना सुबह एक लड्डू लगातार खाये तो 9वें महीने के बाद बच्चे का जन्म बिना किसी कष्ट के आसानी से हो जाता है।
81. सूतिका रोग: 1 किलो मेथी को बारीक पीसकर उसमें 2 किलो घी और 12 गुना दूध मिलाकर आग की धीमी आग पर उबालकर शहद जैसा गाढ़ा बनाएं। उसके पश्चात उसमें 3 गुनी शक्कर डालकर मेथीपाक तैयार कर लें। इस मेथीपाक को प्रतिदिन सुबह 40 ग्राम तक सेवन करने से हर प्रकार के वायु (गैस) रोग नष्ट होते हैं। शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है और वीर्य में वृद्धि होती है। इसके सेवन से सूतिका रोग भी दूर हो जाता है।
82. वातदर्द: मेथी को घी में भूनें और पीसकर आटा बना लें। इसके बाद गुड़ और घी की चाशनी बनाकर उसमें मेथी का आटा डालकर मिला लें और चूल्हे से उतारकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। रोजाना सुबह यह 1-1 लड्डू खाने से वात रोग से जकड़े हुए अंग 1 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं और हाथ-पैरों में होने वाला वातदर्द दूर होता है।
83. स्तनों में दूध बढ़ाना:
30 ग्राम मेथी का आटा रात में 200 मिलीलीटर दूध में भिगोकर रख दें। सुबह-सुबह एक बर्तन में 50 ग्राम घी लेकर चूल्हे पर रखें। घी जब अच्छी तरह गर्म हो जाए तब उसमें दूध में भिगोया हुआ मेथी का आटा डालें तथा उसे हिलाकर एक रस करके बर्तन को चूल्हे से नीचे उतार लें। उसमें लाल गन्ने के 20 ग्राम गुड़ को मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। गर्भवत्ती महिलाओं को इसे 21 दिनों तक खिलाने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।
मेथी के बीज को बारीक पीसकर पेस्ट बनाकर रोजाना सुबह-शाम स्त्री के स्तनों में लगाने से स्तनों में दूध की बढ़ोत्तरी होती है।
20 ग्राम की मात्रा में मेथी को लेकर पीसकर चूर्ण बनाकर 250 मिलीलीटर दूध में अच्छी तरह से पकायें जब दूध लगभग 60 ग्राम यानी चौथाई बच जाये तब इसमें मिश्री मिलायें। इसे प्रसूता स्त्री को पिलाने से लाभ होता है।
शिशु को स्तनपान (दूध का सेवन) कराने वाली नवयुवतियों को रोजाना मेथी का रस या मेथी की सब्जी का सेवन करना चाहिए। मेथी के रस के सेवन से स्तनों में दूध का विकास होता है।

84. घाव:
मेथी के दानों या पत्तों को बारीक पीसकर लेप करने से जख्म की जलन तथा सूजन मिटती है।
मेथी को पीसकर फोड़े के घाव पर लगाने से रोगी का घाव ठीक हो जाता है।
आधा ग्राम से 10 ग्राम मेथी को सुबह-शाम खाने से घाव की वजह से होने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
85. अफारा: 250 ग्राम मेथी और 250 ग्राम सोया को लेकर तवे पर सेंक लें, फिर इसे मोटा-मोटा कूटकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से, लार की अधिकता, अफारा (पेट में गैस का बनना), खट्टी हिचकियां और डकारे आने का रोग मिट जाता है।


86. प्रदर:

लगभग 3 ग्राम मेथी का चूर्ण थोड़े गुड़ और घी में मिलाकर सुबह-शाम के समय चबाकर खाने से और मेथी के आटे की पोटली बनाकर स्त्रियों की योनि में रखने से प्रदर रोग में अच्छा लाभ होता है, इस पोटली के साथ एक लंबा धागा बांधकर रखे जो योनि से बाहर लटकता रहे, ताकि पोटली को सरलतापूर्वक योनि से बाहर निकाला जा सके।
मेथी का चूर्ण बनाकर उसमें थोडे़ सी मात्रा में घी मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।
मेथी बीज को पीसकर गर्भाशय के मुंह पर रखने से सफेद प्रदर में लाभ मिलता है।
87.. खूनी दस्त:
मेथी के पत्तों के रस में काली द्राक्ष पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार (खूनी दस्त) में बहुत लाभ होता है।
मेथी के बीजों को भूनकर, फिर उसका पेस्ट बनाकर रोजाना सेवन करने से रक्तातिसार (खूनी दस्त) का रोग दूर हो जाता है।
88.. रक्तविकार:
 मेथी का 150 मिलीलीटर रस कुछ दिनों तक सेवन करने से खून साफ हो जाता है जिससे रक्तविकार (खूनी विकार), फोडे़-फुसियां व खाज-खुजली आदि रोग समाप्त हो जाते हैं।
89. . त्वचा को कोमल बनाना:
मेथी के पत्तों के रस में नींबू का रस मिलाकर शरीर पर मलने से त्वचा में निखार आता है और त्वचा कोमल होती है।
मेथी के बीज को उबटन (लेप) के रूप में चेहरे पर लगाने से त्वचा साफ और कोमल हो जाती है।
90.  लकवा: 
रोज 2 चम्मच दाना मेथी और बूरे का सेवन करने से सारे रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। जैसे- लकवा, पोलियो, हृदय (दिल) रोग, निम्न एवं उच्च रक्तचाप, कैंसर, मधुमेह (डायबिटीज), गठियाबाय, सांस की बीमारी, हड्डी का बुखार, बवासीर और जोड़ों का दर्द आदि।
91. छाती के रोग: 
3 चम्मच दाना मेथी को 2 कप पानी में डालकर दोपहर में भिगों दें। रात को दाना मेथी को इसी पानी में उबालें, जब यह पानी 1 कप पानी रह जाए तो इसमें स्वादानुसार शहद मिलाकर सोते समय कुछ सप्ताह तक रोजाना पीते रहने से विभिन्न प्रकार की बीमारियों में लाभ मिलता है, जैसे: कफ (बलगम), दमा, फेफड़े के रोग, टी.बी., शराब, पीने के दुष्प्रभाव, यकृत (जिगर) सिकुड़ना, कुपोषण, गठिया, जलोदर (पेट का पानी भरना), तिल्ली (प्लीहा), पीलिया, रक्ताल्पता (खून की कमी), कमर-दर्द और अनियमित माहवारी आदि।
92. सन्निपात ज्वर: 
10 ग्राम मेथी, 10 ग्राम मीठी सुरंजन, 10 ग्राम सौंठ, थोड़ा असगंध, 5 ग्राम कालानमक को एक साथ पीसकर छान लें, सुबह-शाम भोजन के बाद गर्म पानी से लेने से सिन्नपात ज्वर ठीक हो जाता है।
93. पुनरावर्तक ज्वर:
 10 से 20 ग्राम मेथी के अंकुरित बीज को सुबह-शाम सेवन करने से पुनरावर्तक बुखार में लाभ होता है।
94. दमा या श्वास रोग:
यदि रोगी दमा से पीड़ित हो तो थोड़ी सी मेथी पानी में उबालकर उसका रस निकालकर सेवन करना चाहिए।
यदि रोगी दमा से पीड़ित हो तो 4 चम्मच मेथी को 1 गिलास पानी में उबालें। आधा पानी रहने पर छानकर गर्म-गर्म ही पीना चाहिए।
95. बालों का सफेद होना, 
पालित रोग: मेथी को खाने और इसका तेल सिर में लगाने से सफेद बाल कम होते हैं।
96. छाती का जमा हुआ दूध निकालना: 
10-10 ग्राम मेथी, अलसी को सिरके में पीसकर स्त्रियों के छाती पर लेप करने से छाती में जमा हुआ दूध निकल जाता है।
96. दस्त के आने पर
: 4 ग्राम मेथी के साग को देशी घी में डालकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से दस्त का बार-बार आना बंद हो जाता है।
97. . कमजोरी:
6 ग्राम गुलशकरी की जड़ को 10 ग्राम मिश्री मिले दूध के साथ पीने से कमजोरी मिट जाती है।
5 से 10 ग्राम मेथी के बीज को सुबह-शाम गुड़ में मिलाकर सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है।
98. . कान का बहना:
 मेथी के दानों को दूध में भिगो लें। फिर इसे दूध में से निकालकर पीस लें और गुनगुना करके कान में डालें। इससे कान में से मवाद बहना बंद हो जाता है।
99. . मासिक-धर्म सम्बंधी परेशानियां:
 50 ग्राम मेथी के बीज और 40 ग्राम मूली के बीज को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2-2 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिक-धर्म सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
100.  आंव रक्त (पेचिश):
मेथी के दानों को पीसकर दही के साथ खाने से पेचिश के रोगी को आराम आता है।
3 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर 100 ग्राम दही में मिलाकर खाने से पेचिश के रोगी को लाभ होता है।
मेथी, राई, अजवायन और नमक को मिलाकर 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पेचिश का रोग दूर हो जाता है।
50 ग्राम दाना मेथी और 50 ग्राम सोंठ को पीसकर 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर रख लें। सुबह-शाम भोजन के आधे घंटे बाद 10-10 ग्राम की मात्रा में रोजाना खाने से आंव का आना बंद हो जाता है और पेट में भोजन का पाचन ठीक होता है।
मेथी के आटे को दही में मिलाकर सेवन करने से पेचिश मिटती है।
101. हड्डी कमजोर होने पर: 
मेथी बीज का पाउडर 5 से 10 ग्राम बच्चों को 3 से 6 ग्राम गुड़ के साथ सुबह-शाम खिलाने से हडि्डयां मजबूत होती हैं।



102. दर्द व सूजन: 
100 ग्राम दाना मेथी तवे पर इस तरह भूने कि आधी कच्ची व आधी सिंकी हुई रहे। फिर इसे पीस लें। इसमें 25 ग्राम यानी चौथाई भाग कालानमक मिलायें, इसको सुबह-शाम 2 चम्मच गर्म पानी से फंकी लें। इससे जोड़ों का दर्द, कमर-दर्द, घुटनों का दर्द तथा हर प्रकार के दर्द ठीक हो जाते हैं और गैस भी नहीं बनती है।
103. जलोदर: 
दाना मेथी (methi dana )की सब्जी खाने से या दाना मेथी का भिगोया हुआ पानी पीने से जलोदर (पेट में पानी का भरना) में लाभ होगा।
104. बच्चों के मधुमेह रोग: 
5 ग्राम मेथी को थोड़ा-सा पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर छानकर रखें। इस पानी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीने से मधुमेह (डायबिटीज) में लाभ होता है।
105. गिल्टी (ट्यूमर):
मेथी के बीज या पत्तों को पीसकर गिल्टी (ट्यूमर) पर लेप करने या बांधने से लाभ होता है।
मेथी, हल्दी और एरण्डी के तेल को पीसकर और गिल्टी (ट्यूमर) पर बांधना चाहिए। इससे रोग में आराम मिलता है।
106. शीतपित्त: 
मेथी के दाने, कालीमिर्च और हल्दी को 1-1 चम्मच की मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। फिर थोडे़-से अदरक के रस में मिलाकर चने के बराबर की गोलियां बना लें। 1 गोली सुबह-शाम पानी से खाने से लाभ होता है।
107. शिरास्फिति:
5 से 10 ग्राम मेथी के बीज सुबह-शाम गुड़ के साथ मिलाकर सेवन करने से लाभ मिलता है और हाथ की नाड़ी (शिरा) अपने जगह पर ठीक रहती है। 5 से 10 ग्राम मेथी के बीज गुड़ के साथ सेवन करने से इस रोग में लाभ मिलता है।
रोगी की शिराओं को फूलने से रोकने के लिए मेथी को पीसकर उसका लेप लगाकर उसको कपड़े से बांधने से लाभ मिलता है।
108.. नजला, नया जुकाम
: 5-5 ग्राम मेथी और अलसी को 200 ग्राम पानी में डालकर उबालने के लिए रख दें। जब यह एक चौथाई शेष बचे तो इसे छानकर पी लें। इसको पीने के 3 घंटे के बाद और पहले कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए।
109. मूत्ररोग:
गुलकशकरी यानी जंगली मेथी के पत्तों को पीसकर और घोंटकर रोगी को पिलाने से पेशाब खुलकर आता है।
2 चम्मच मेथी की पत्तियों का रस सुबह के समय 8-10 दिन तक सेवन करने से मूत्ररोग दूर हो जाता है।
110. एलर्जी: मेथी की पत्तियों को पीसकर एलर्जी वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
111.. चेहरे की झांई होने पर:
मेथी को बारीक पीसकर मक्खन में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की झाईयां दूर होती हैं और चेहरे की खूबसूरती बढ़ती है।
मेथी के पत्तों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे के दाग-धब्बे समाप्त हो जाते हैं। त्वचा का सूखापन दूर होता है और चेहरे की झुर्रियां भी दूर हो जाती हैं। चेहरे पर ताजगी बनी रहती है। पत्तों की जगह मेथी के दानों को भी दूध में मिलाकर लेप बना सकते हैं।
112.. उच्च रक्तचाप:
मेथी के सूखे दाने को बारीक पीसकर 1 चम्मच को फंकी के रूप में सुबह-शाम खाली पेट 1 महीने तक पानी के साथ लेने से उच्चरक्तचाप कम होता है। इससे मधुमेह (डायबटीज) में भी लाभ होता है।
मेथीदाना और सोया के दाने पीसकर सुबह-शाम पानी के साथ लेने लेने से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) काबू में आ जाता है।
113.. दिल की कमजोरी: 
5 ग्राम मेथीदाना लेकर उसका काढ़ा बना लें, इसमें शहद मिलाकर खाने से पुराना से पुराना दिल का रोग भी ठीक हो जाता है।
114.. हाथ-पैरों की जलन: 
मेथी के पत्तों को अच्छी तरह से पीसकर मालिश करने से हाथ-पैरों की जलन मिट जाती है।
115.. चेचक (मसूरिका): 
मेथी के बीजों को भूनकर उसका फांट बनाकर रोजाना 3 से 4 बार रोगी को पिलाने से चेचक के रोग में लाभ होता है।
116.. वातरक्त दोष:
 5 से 10 ग्राम मेथी के बीजों (methi dana )को सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से त्वचा का फटकर खून निकलने में लाभ होता है।
117. . होठों का फटना: 
5 से 10 ग्राम मेथी के बीजों का चूर्ण सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से त्वचा या होठ फटने की वजह से खून निकलने की शिकायत दूर हो जाती है।
118. . शरीर में सूजन: 
मेथी की पत्तियों को पीसकर उसमें 2 कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर शरीर में सूजन वाले स्थान पर बांधने से सूजन खत्म हो जाती है।
119.  गण्डमाला:
 5 से 10 ग्राम मेथी के बीज सुबह-शाम गुड़ के साथ खाने से गण्डमाला के रोग में आराम आता है।